7 Sep 2011

कहिनी - मईके के सुरता

फूफू के लिगरी म सातो ह भार्इ मन करा बांटा मांगे बर उमियागे। पंचइत सकेल के अपन ददा के जहिजात म हिसा मांगिस। नित नियाव म लड़के सातो ह अपन ददा के जहिजाद मे हिसा पा लिस। फेर बपरी के जीयत भर बर मइके के मया छुटगे। आगी लगे अइसन नियाव म जोन मया ल टोरथे। कीरा परय ऊकर मति म जेमन धन के पाछु मया जोरथे।
 बिहाव के पाछु बेटी मार्इ ल मइके ले एक लोटा पानी के आस रइथे। तिजा पोरा अउ मातर मड़र्इ म नेवता हिकारी के अगोरा रइथे। तथे तो मइके के कुकुर ल घलो ससुरार म भार्इ बरोबर मान गवन करथे। सातो ह मुहांटी म बइठे बइठे अपन तिजा लेवइया के अगोरा करत बइठे हे। येहु साल आय के आस तो नइ हे फेर का करबे सातो के मन मानबे नइ करय।
 अपन दुवार म बइठे सातो ह सबो के लेगर्इया ल आवत देखत हे। सातो के मन के लालच के तेलर्इ म मइके के सुरता डबके लगथे। सुरता म चुरत मन फुसुक फुसुक रो परथे। गोहार पार के रोए म ओकरे फधित्ता होही। बपरी ल कोनो पुछ परही त का बताही। फूफू ह अपन लालच बर सातो के मति बिगाड़े रिहीस। भार्इ-बहिनी अउ ननंद-भउजी के नता म जोझा पारे रिहीस। सातो ह मने मन अपन करम ल कोसत आजो तिजा लेवर्इया अगोरत हे।
 सातो ह नहां खोर के बिहनीया ले तियार होगे। अलवा जलवा मुड़ी कोरे लकर धकर नंदिया खड़ के पिपराही म आके बइठे हे। अवइया जवइया मन ल टुकुर देखत हे। भादो के महीना म नंदिया ह मुड़ भर बोहावत रिहीस। नंदिया नरवा ह कातको जोझा पारे तिजा मनर्इया मन तो जा के रही। देवता बरोबर डोंगहार ह सबे झन ल ए पार ले ओ पार नहकावत हे। बांस भर पानी म तउरत डोंगा म सवार तिझयारिन मन ल देख देख के सातो के मन निचट उदास होगे हे।
 पछतावा के आसु ले बोट बोटाय सातो के आखी म नंदिया के ओ छोर ले डोंगा चड़हत अपन भार्इ दिखीस। पिपराही ले रटपटा के उठीस अउ चुंदी मुड़ी ल संवारत नंदिया कोती दऊड़गे। सातो के हांसी खुसी के ठिकाना नइ हे। नंदिया के छोर म खड़े अपन भार्इ के अगोरा करत पउर साल के तिजा ल सोरियावत हे।
 सातो के दादा ह अपन बड़े बेटा पुनऊ ल किथे- सातो ल तिजा लाने बर आठे मान के चल देबे रे। आंहू किही त संग म लान लेबे। निंदर्इ कोड़र्इ के दिन घलो चलत हे। दमांद कर जादा जोर-जबरर्इ झन करबे। अब आज काल तो सब पोरा मान के आथे जाथे। नंदिया नरवा के कारो बार अगवाके रेंग जबे।
 उंचकहा मुंहा पुनऊ अधरसÍी सुनिस। आठे मान के कांहा आठे के एक दिन अगाहू रेंग गे। पुनऊ ल सातो घर जाय बर पुचपुचाए। बारी म बोवाए खीरा ल झोला भर टोरिस। करेला अउ डोड़का के एकक ठन मोटरी गठिया के निकलगेेे सातो घर जाए बर।
पुनऊ अउ सातो के नानपन के हांसी दिल्लगी ह बर बिहाव होय के बाद घलो नर्इ छुटे रिहीस। संगे बर बिहाव होइस संगे दोनो के गवन पठौनी होगे। सातो के ददा ह गांव के बड़का किसान रिहिस। घर म चिज बस कांही के खंगता नइ रिहीस। गांव म ऊंकरे सुती चले ते पाय के पुनऊ ह थोकिन अड़दली रिहीस।
 ददा ह जाय ल केहे हे किके बारी ले घर नइ अइस मोटरी धरे सोज सातो घर रेंग दिस। घर ले बता के जातिस त भउजी ह रोटी पीठा जोरतिस। ददा ह बारी म गोठियइस सातो घर जाबे किके। पुनऊ ह कोनो ल आरो करे बिगर मोटरी भर साग भाजी धरके निकलगे। पुनऊ ह पैडगरी रद्दा म अकेल्ला रेगंत झोला के खीरा ल खावत खावत जावत रिथे। नंदिया खड़ के पहुचत ले झोला ल अपने ह अधिया डरथे। सातो ल देहू किके आधा झोला खीरा ल बचाय घाट म पहुचे हे। किंजर किंजर के डोंगा देखत हे। काम कमर्इ के दिन म डाेंगा घलो कम चलत रिहीस। एके ठन डाेंगा वाला रिहीस। उहू ह वो पार खड़े रिहीस।
 कांहा डाेंगा अगोरत रइहा किके पुनऊ ह मुड़ भर बोहावत नंदिया ल तऊर के नाहक गे। दूनो हाथ म एकक ठन मोटरी ल धरे हे। खीरा के झोला ल टोटा म अरोय हे। पार म नाहक के सबो समान ल टमडि़स। करेला अउ डोड़का के मोटरी तो बने रिहीस फेर खीरा ह बोहा गे रिहीस। पुनऊ ह सालेच के झोला भर खीरा धरके निकलथे। कोनो साल अपने ह खाते खात सिरवा डरथे। त कोनो साल नंदिया म बोहा जथे। सातो ह करेला अउ डोड़कच पाथे।
 कच्चा-कच्चा कुरता ल पहिने पुनऊ ह सातो घर पहुचीस। भार्इ ल देखके सातो ह मगन होगे। लोटा भर पानी दिस अउ पावं परिस। सुख्खा गमछा म मुड़ी कान ल पोछीस। पुनऊ ह मोटरी ल लमावत किथे- येदे बहिनी करेला अउ डोड़का लाने हवं। सातो किथे- खीरा घलो तो फरे होही भार्इ। खीरा काबर नइ लानेस। अतका ल सुन के पुनऊ ह दुच्छा झोला ल लमा देथे। दुच्छा झोला ल देख के सबो झन कठल के हांसथे।
 अपन भार्इ के सुध म मगन हे सातो। खुशी के आसु ल पोछथे अउ हांसत हांसत किथे- यहू साल एको ठन नइ बचाय भार्इ। कइसे पुनऊ भार्इ कलेचुप काबर हस। जब आथस तब दुच्छा झोला देखाथस। कहां करथस मोर बाटा के खीरा ल। सातो के गोठ ल सुन के डोंगा ले उतरत अनगइहा सगा ह सातो ल किथे- कोन ल काहत हस वो। मै तो तोला नइ चिनहत हवं। अतका ल सुन के सातो के मन के भरम टुटगे। सातो ह अनचिनहार ल अपन भार्इ जान के गजब आस लगा डरे रिहीस। बपरी ह निरास होके आसु ल पोछत फेर पिपराही म लहुटगे।
 सातो के मन म का बितीस होही जब अनचिनहार ल भार्इ जान के मया लड़ावत रिहीस। उहू अनगइहा ह नइ चिनहवं कइ दिस। एक घांव बहिनी की देतीस त ओकर का बिगड़ जतीस। सातो अपन मन मढ़ावत किसमत ल कोसत हे। आखिर गलती तो ओकरो कोती ले होए हे। सबो बने बने चलत रिहीस। एक दिन अचानक सातो के ददा बितगे। ददा के बिते के पाछु पुनऊ ह बहिनी ल बेटी बरोबर मया दुलार करे। तिजा पोरा म पुछे-गउछे। भउजी घलो सातो ल नोनी ले आगु एक भाखा नइ बोलत रिहीस। आगु के आगु ओकर बर लुगरा पाटा लेवत रिहीस। इही बात ह पुनऊ के फूफू ल नइ सुहइस। पुनऊ करा अपन भार्इ के जहिजाद म हिसा मांगे बर आगे। पुनऊ मन एक भार्इ एक बहिनी हे ओइसने ओकर ददा मन घलो एक भाइ एक बहिनी रिहीस। झगरा लड़के फूफू ह अपन नता तो टोरिस संग म सातो ल घलो जुझो दिस।
 फूफू ह घेरी बेरी सातो घर जाके ओकर भउजी के लिगरी लगावत काहय- सातो तोर भउजी ह सबे चिज बस ल अपन मइके म लेग लेग के जोरत हे। तोर भाइ ह सिधवा हे अउ भउजी चाल बाज। चिज बस के राहत ले पुछत हे। सिरावन तो दे कुकुर नइ पुछे तोला। फूफू ह तो अपने घर के आए अउ भाउजी ह पर घर ले आए हे। इही सोच के सातो ह घलो फूफू के बात म आगे अउ जुरे पंचइत म बाटा बर खड़ा होगे।
 सातो मने मन गुनत हे। बाटा नइ मांगे रइतेवं त आज मोरो भार्इ लेगे बर आए रितीस। भउजी ह तिजा के जोरा करतिस। गुनते गुनत सातो ल पिपराही म बइठे बिहनीया ले संझा होगे रिहीस। सातो ह अपन मन ल मारत घर आए बर उठिस। रोनमुहा मु धरे घर जाना बनो नोहे किके सातो ह नंदिया के तिर म गिस। माड़ी भर म उतर के ठोमहा म पानी लेके मुह ल धोइस।
 नंदिया भीतर ले मुह धो के लहुटत रिहीस तभे सातो के पांव कुछु जिनीस अभरीस। हांथ ल बुड़ो के टमड़ीस त सातो ल दू ठन मोटरा मिलीस। मोटरा भीतर म करेला अउ डोड़का बंधाय रिहीस। दोनो मोटरा ल धर के सातो पार म आवत रिहीस तभे आगु म एक ठन दुच्छा झोना बोहावत रिहीस। दुच्छा झोला अउ मोटरी ल पाके सातो के खुसी के ठिकाना नइ रिहीस। भार्इ नइ अइस त का होगे। भार्इ के चिनहा ह आगे। मइके के सुरता म उदास मन ल मढ़ावत सातो ह अपन घर लहुटगे। मइके के सुरता देवावत दुच्छा झोला अउ मोटरी ल देख देखके सातो ह पोरा अउ तिजा मनइस।

1 comment:

  1. बढि़या जयंत, अच्‍छा सुरुआए हस, चलात रहि.

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