20 Oct 2012

जोत जेवांरा

             जेवरहा घर म बदना के दिन ले ही जेवांरा के जोरा करे के सुरू हो जथे। जेवांरा बोये के पाछू घर के कोनो मनौती पूरा होय के बाद या बदना बदे बर घलो जेवांरा बोथे। चइत-कुवार के महीना म मंदिर देवाला म जोत-जेवांरा बोय देखे पर मिलबेच करथे फेर हमर छत्तीसगढ़ के घरों म घलो जेवांरा बोय के पंरपरा हवय। जेवांरा बोइवया मन घर म कोनो देवी के मूर्ति के स्थापना नइ करय बल्कि अपन घर के मानता रूपी कुल दाई के अंगना म जोत बारथे अउ फुलवारी बोथे। इहां घरों-घर म देवी स्थान मिलथे फेर कहू मूर्ति रूप म नइ मिलय देखब म सिरिफ कुड़ही अउ कोनो घर म कटारी ह दिखथे। उही कुड़ही अउ कटारी ह कुटुम के देव-धामी आए। जग जेवांरा के बात होवय या कोनो उच्छाह मंगल अउ बिपत के बेरा ऊहचे हूम जग देके बदना बदथे। जेवरहा घर जेवांरा पाख के अगाहू समान के जोरा करे के सुरू हो जथे। कलस, बिरही, तेल,बाती, गुड़ी अउ सिंगार के समान ल नेवता देके बनवाय जाथे। कुम्हरा घर नेवता देके कलसा बनावाथे। कलसा बने के बाद कुम्हार ह बने के आरो करथे त घरवाले मन स्नान करके खुल्ला पावं रेंगत-रेंगत कुम्हार घर जाथे अउ चरिहा म बोह के रेगते घर आथे। घर के मुहाटी म पहुचथे तव घर के माइलोगन मन दुवारी म एक लोटा पानी ओछार के कलसा ला भितरी बलाथे। कोष्टा घर ले ओन्हा -कपड़ा अउ बाती मंगवाय के बखत घलो अइसने होथे। छत्तीसगढ़ म कोनो भी नवा जिनिस ला पबरित करके भितराय बर घर के मुहाटी म लोटा म पानी ओछारे के पंरपरा हवय। ये पंरपरा आज के नोहय तइहा ले चले आवथे। जेवांरा के सबो समान सकलाय के बाद नौ दिन गाए बर गांव के सेउक मन ल घलो नेवता देथे। जेवांरा के नेंग जोग ह सेउक मन के जासगीत बिगर पूरा नइ होवय। जइसे बर-बिहाव म सबो नेंग गीत ले चलथे ओइसने बरोबर जेवांरा म घलोक नवों दिन के अलग-अलग गीत ले सेवा गाए जाथे। जेवंरहा घर के चलागन अनुसार जेवांरा बोथे। कतको घर सेत पूजा कतकोन घर मारन के परंपरा म चलाथे। सेत पूजा म देवी म कोनो परकार के जीव के मारन नी होवय। दाई ल लिमवा अउ नरियरे ले मनाथे। जेवरहा घर म लिमवा अउ नरियर के बड़ महत्ता हे येला सेत पूजा वाला मन बोकरा-भेड़वा के सेती देथे। मारन वाला मन घलो अब  धीरे-धीरे सेत पूजा म देवी ल मनावत हवय।  रातिहा के फिलोय बिरही ल एक्कम के बिहनिया ले जेवांरा बोय बर जेवरहा घर म गांव के बइगा अउ सेउक मन सकलाथे। माता सेवा के गीत के संग जेवांरा ल कलस म बोये जाथे। कलस म जोत बारे जाथे। घर के चलागन अनुसार कतकोन घर दू ठिन कलस त काकरो घर तीन ठिन कलस मड़ाथे। माई कलस, सत्ती, खप्पर अउ माई दरबार म लगे फुलवरी के निसदिन पंडा अउ घर वाले मन संग गांव के सेउक मन सेवा गाथे। पंडा ह नौ दिन के उपास राखथे। पंचमी के दिन माई के अंगना ले पंडा मन गांव के देवी देवता के दरस करे बर निकलथे जेला पंडा निकालना कहिथे। पंडा सेउक मन संग गांव के मंदिर देवाला म हूम देवत, सबो जगा के पंडा मन एके जगा जुरियाथे। गांव के शितला दाई ठऊर ले बैरग घलो संभराके निकाले जाथे। इही दिन कलस अउ फूलवारी म ध्वजा जोतिया घलो चघाय जाथे। अष्टमी के हवन अउ नवमीं के दिन जेवांरा के विसर्जन के होथे। विसर्जन बर सरवर जावत माता ह अपन लंगूरें मन संग नाचत-गावत निकलथे। कतकोन झन मन देवता चढ़ के झुपत-झुपत माई ल सरवर अमराथे। देवता झुपइया मन अपन आस्था अउ भक्ति ल किसिम-किसिम ले देखाथे जेमा सांग, बाना, सोटा, बोड़ा लेवत झुमरत रिथे।
jayant sahu, raipur c.g.
 

4 Oct 2012

सुरता हीरालाल काव्योपाध्याय 2012

छत्तीसगढ़ी व्याकरण के सर्जक हीरालाल काव्योपाध्याय
               नव उजियारा सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था डहर ले आयोजित सुरता हीरालाल काव्योपाध्याय 2012 म छत्तीसगढ़ी भाखा खातिर जबर बुता करइया जुन्नटहा साहित्यकार मन के सम्मान करे गिस। 23 सितंबर के वृंदावन हॉल रायपुर म माई पहुना माननीय चंद्रशेखर साहू मंत्री छत्तीसगढ़ शासन अऊ माननीय विजय बघेल के पगरईती म साहित्यकार डॉ. बलदेव साव (रायगढ़), डॉ. दशरथलाल निषाद 'विद्रोही (धमतरी), श्री रघुबीर अग्रवाल 'पथिक (धमतरी), डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र जी मन सम्मानित होइन। इही संघाती हीरालाल काव्योपाध्याय के रेखाचित्र ल साकार रूप देवइया चित्रकार भोजराज धनगर के घलो शॉल, श्रीफल अउ स्मृति चिन्ह ले सम्मानित करे गिस।
          संस्था के अध्यक्ष सुशील भोले अउ सचिव जयंत साहू ह संघरे विज्ञप्ति जारी करत बताइन कि कार्यक्रम म आमंत्रित वक्ता डॉ. प्रभुलाल मित्र जी ह हीरालाल से हीरालाल काव्योपाध्याय तक के जीवन के बारे म संक्षित जानकारी देवत उनकर व्यक्तित्व, शिक्षा अउ व्यवसाय के बारे म अवगत करावत किहिन कि ये हमर बर गरब के बात आए की हमन बहुमुखी प्रतिभा के धनी के धरती म जनम लिये हन। तव हमरो फरज बनथे कि हमू मन हीरालाल काव्योपाध्याय के करे कारज ल सुरता करन अउ ओकरे देखाय रद्दा म रेंगन। संस्था के अध्यक्ष सुशील भोले ह अपन स्वगत भासन म पहुना मन ले निवेदन करिन कि शासन ह हरेक साल राज्योत्सव म गजब अकन सम्मान बांटथे, ओमा हीरालाल काव्योपाध्याय के नाव से सम्मान के अभी तक नइ सुरू करे गे हवय। अभी तक जतेक भी सम्मान के दे जावथे उंकर कारज के गुनान करे जाए तो हीरालाल काव्योपाध्याय के बुता ह सबले जबर हे। शासन हा हीरालाल काव्योपाध्याय सम्मान अउ पं. रविशंकर शुक्ल विश्व विद्यालय म हीरालाल काव्योपाध्याय शोध पीठ बनय। संस्था के ये मांग म पहुना मन के संगे-संग कार्यक्रम म उपस्थित प्रदेश भर के साहित्यकार मन घलो एक सुर येकर समर्थन करिन।
            मुख्य अतिथि चंद्रशेखर साहू जी अपन उद्बोधन म किहिस कि हीरालाल काव्योपाध्याय सचमुच म छत्तीसगढ़ के गौरव आए आउ मैं आज ये जलसा म आके अपन आप ल भागमानी महसुश करत हाबवं। काबर कि मोरे विधान सभा क्षेत्र अभनपुर के कॉलेज के नामकरण हीरालाल काव्योपाध्याय के नाव म करे गे हाबय। अतेक दिन बिते के बाद घलो इहां के साहित्य-कला जगत के गजब झिन मन उनला जानबे नइ करय ये हमर दुर्भाग्य आय। हीरालाल जइसे महापुरूष के कारज न बिरथा नइ जावन देवन, ओकर सहिक काम तो नइ करे सकन फेर ओमन जेन छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़ी बर करिन ओला सुरता तो करेच सकथन। ओमन संस्था के कारज के सराहना करत स्वेच्छा अनुदान दे के घोषण घलो करिन अउ यहू वादा करिस कि शासन ह घलोक अइसने देवें एकर बर ओमन पूरा प्रयास करहीं। कार्यक्रम पगरईती करत माननीय विजय बघेल ह किहिन कि हीरालाल सिरतोन के हीरा रिहन अउ हीरे का परख ल जौहरी जानथे फेर आज काल के जौहरी अपन-अपन स्वार्थ साधे बर विभूतियों की आढ़ लेथे। अइसन स्वार्थी मन ले हट के हमन ला निस्वार्थ काम करना हे अउ हीरालाल जइसे हीरा के चमक ल कमतियावन नइ देना हे। अऊ आगू वोमन किहिन कि छत्तीसगढ़ी भाखा ल संविधान की आठवीं अनुसूची में सामिल करवाय बर हर संभव प्रयास करहीं।





             कार्यक्रम म सम्मान समारोह के बाद दूसरइया पांत म छत्तीसगढ़ी काव्य पाठ के घलो आयोजन करे गे रिहिस। जेमा संस्था के सुशील भोले, चंद्रशेखर चकोर, जंयत साहू, गोविंद धनगर, तुकाराम कंसारी, दिनेश चौहान, भोलाराम सिन्हा के संगे-संग साहित्यकार डॉ. सुखदेव राम साहू, डॉ. निरूपमा शर्मा, डॉ. पंचराम सोनी, श्रीमती सुधा वर्मा, अंजनी कुमार अंकुर, डॉ. दुर्गा मेरसा, जगतारण डहरे, श्यामनारायण साहू, दुर्गा प्रसाद पारकर, नेमीचंद हिरवानी, शरद कुमार शर्मा, दिवाकर मांझी, मकसुदन राम साहू, बन्धु राजेश्वर राव खरे, चोवाराम, विटठलराम साहू, सगार कुमार शर्मा, प्रो. अनिल भतपहरी, पुनूराम साहू, श्रीधर वराडे, कु. रीता विभारे, श्रीमती जयभारती चंद्राकर, परमेश्वर कोसे, जे.आर.सोनी, राम बिशाल सोनकर, हेमंत वैष्णव, उत्तम ठाकुर, श्रीमती शोभा शर्मा, श्रीमती आशा ध्रुव, पं. सुदामा शर्मा अऊ गजब झिन कविता प्रेमी, कवि, साहित्यकार उपस्थित  रिहिन।
                                                            

  जयंत साहू