5 Oct 2015

मानव सेवा के प्रतिमूर्ति: स्वामी आत्मानंद

छत्तीसगढ़ के संत महात्मा मन मानव सेवा के जबर बुता करे हाबे। जेमा गुरू घासीदास, धनी धरमदास, भक्त वल्लभाचार्य के नाव अजर-अमर हवय। इही कड़ी म स्वामी आत्मानंद जी के नाव ल तको सोरियाथन जोन ह नान्हे उमर म जवनहा मन ला जगाए के उदीम करिस। किसनहा परवार के गुनिक लइका तुलेद्र वर्मा, भारतीय प्रशासनिक सेवा के परीक्षा पास करे के बाद घलो नौकरी नइ करिस अउ मानव सेवा के रद्दा म निकलगे। दुनिया म मानव सेवा के अलख जगइया स्वामी आत्मानंद मोह-माया ल छोड़ सकल जगत बर जीयत अम्मर होगे। अइसन महापुरूष के जनम छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़िया किसान परवार म होइसे ये हमर बर गरब के बात आए। 

अवतरन

मानव सेवा के प्रतिमूर्ति स्वामी आत्मानंद जी के अवतरन रायपुर जिला के बरबंदा गांव म 06 अक्टूबर 1929 के होइस। ओकर ददा के नाव धनीराम वर्मा अउ महतारी के नाव भाग्यवती रिहिस। छत्तीसगढ़िया किसान परवार म जनमे तुलेंद्र वर्मा के भाग ल कोनो नइ सोचे रिहिन होही के ओ लइका ह एक दिन स्वामी आत्मानंद बनके समाज म मानव सेवा के अलख जगाही। स्वामी आत्मानंद के नानपन के नाव तुलेंद्र वर्मा रिहिस। ओमन पांच भाई रिहिन, जेन म दू भाई स्वामी त्यागानंद जी अउ स्वामी निखिलात्मानंद ह ओकरे रद्दा म आगू चलके सन्यासी होगे। एक भाई डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा छत्तीसगढ़ी के बड़का कलमकार होइस अऊ एक भाई ओमप्रकाश वर्मा ह विश्वविद्यालय म प्रोफेसर होइस, आगू चलगे उही ह आत्मानंद विद्यापीठ तको चलाइस।

शिक्षा  

स्वामी आत्मानंद के ददा धनीराम जी हा गांधीवादी विचारधारा के मनखे रिहिस। ओमन ह वर्धा के आश्रम म लइका मन बुनियादी शिक्षा देवय। ददा संग बालक तुलेंद्र तको वर्धा के आश्रम म राहय। गांधी जी के अक्सर वर्धा आश्रम आना होवय। जब भी गांधी जी आश्रम आवय तव तुलेंद्र ह ओकर लउठी ल धरके आगू-आगू रेंगय। नानपन ले ही ओला गांधी जी के आसिरबाद मिलीस। बालक तुलेंद्र ह नानपन ले ही पढ़ई-लिखई म गजबे होसियार रिहिस हाबे। आगू के पढ़ई ल तुलेंद्र ह विवेकानंद आश्रम नागपुर म रहिके गणित विषय म एम.एस.सी. करिस। पहिली स्थान आए के सेती ओला सोन के तमगा तको मिलिस। अऊ संगवारी मनके सलाह ले ओहा आईएएस के परीक्षा म तको बइठिस, ओकर नाव ह पहिली दस स्थान अवइया के सूची म रिहिस तभो ले ओमन नौकरी ल तियाग दीस। येहा भारतीय प्रशासनिक सेवा के सबले बड़का परीक्षा आए जेन ल पास करे के बाद ये परीक्षा ल पास करइया लइका मन कलेक्टर, कमीश्नर बनथे। ओहा बड़े परीक्षा पास करके नौकरी के ल रद्दा छोड़ के स्वामी विवेकानंद के मानव सेवा के रद्दा म चलिस उही जवान ह आगू चलके छत्तीसगढ़ के नाव देस भर म बगरइस। 

सन्यास    

स्वामी विवेकानंद के संदेस अउ सिद्धांत ओकर हिरदे म बसगे रिहिस। थोरिक दिन अपन घर रायपुर म रहिस। तभें एक दिन तुलेंद्र ह अपन दाई सो पुछिस- दीदी जाँव का? ओहा अपन महतारी ल दीदी काहय। महतारी तको कहू जाय बर पूछत होही किके जाना कहि दिस। तुलेंद्र ह माया-मोह ल छोड़के आश्रम म चल दिस। आश्रम म ओकर नाव ब्रह्मचारी तेज चैतन्य धरागे। रामकृष्ण आश्रम म रहिके साधना करिस, बड़े-बड़े तिरिथ करिस। हिमालय परबत म तको गिस। गुरू के बात ल गुनिस। 1960 म तेज चैतन्य ह सन्यास लेके स्वामी आत्मानंद बनिस।

सेवा 

स्वामी आत्मानंद ह रायपुर (बरबंदा)के रहइया आए अउ ये माटी म स्वामी विवेकानंद के चरन परे हाबे कहिके इहां स्वामी विवेकानंद के नाव म आश्रम बनाइस। जिहा गरीबहा लइका मन रहिके पढ़ई-लिखई करिस। स्वामी आत्मानंद ह आदिवासी अंचल नारायणपुर म आश्रम सुरू करके वनांचल के लइका मन ल पढ़ाइस। अकाल-दुकाल के दिन म ओमन गांव-गांव म तरिया ल अऊ कोड़वाय। पचरी बंधवाय, किसान मनला खेती किसानी म तको मदद करय।

निर्वाण 

छत्तीसगढ़ म मानव सेवा अउ शिक्षा-दीक्षा के अंजोर बगरइया स्वामी आत्मानंद ह 27 अगस्त 1989 के ये दुनिया ले बिदा होगे। 
                                                                                  स्रोत- छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम (कक्षा-5, भारती)


jayant sahu /जयंत साहू

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