5 Dec 2016

आरबीआई देव! हमु ला 'जियो'


नोटबंदी के बाद ले चारो मुड़ा इहिच गोठ सबोच के मॅुह म। अब का होही भाई समारू, कइसे करबोन ग बुधारू? जेन कभु टीबी, रेडियो अउ पेपर ले दुरिहा हावय तेने मन रई-रई के आरो लेवत रिथे। अऊ कोनो नवा खबर आगे का रे तिहारू? दसरू हर समारू, बुधारू अउ तिहारू सहिक छोटे पोटा के नइये। छाती फूलोवत किथे- जेन गड़ौना मन गड़िया-गड़िया के राखे हावय तेन मन फिकर करय। मुरहा-पोट्टा कना पइसच नइये तव फिकर काके! धरे हाबन तेन हमर कमई के पइसा आए। आयकर ल सबूत जाही तव गरीब मजदूर मनके ओनहा ल संझाकुन निचो के देख लेही। चेंदरा ले अतका पछिना चुचवाही के धनाहरी-पेटकाप्टी मन बूड़ मरही। मोदी के एक बात अऊ बड़ निक लागिस। ओमन अपन सबो मंत्री मनके खाता के जानकारी मांगे हावय। मंत्री का कका, सबो सरकारी अफसर-कर्मचारी मनके खाता के जांच होवय। गरीब के हक मार-मार के अपन म भोभस भरे हावय।
होये के रिहिस तने होगे। आगू अवइया दिन म का होही येकर गुनान करे जाय तव अब सबके हाथ म एकक मोबाइल होना घातेच जरूरी होही। वहू म इंटरनेट डाटा राहय। सरी कामकाज नेट बैंकिंग ले होही। थइला अउ घर नगद रूपिया रखना नइये। हमर बैंक खाता म पइसा माढ़ेच-माढ़े लेन-देन चलत रइही। ताजा खबर के मुताबिक अब मोबाइल, बैंक एप, पेटीएम, एसएमएस, के झंझट तको करे बर नइ लागय। चेक, डीडी, एटीएम, क्रेडिट, डेबिड कार्ड कुछूच नइ लागय। अब तो आधार नंबर ले लेन-देन के उदीम करे के जोंगत हावय सरकार। माने बइठे-बइठे देखव तमासा, आगे-आगे होता है क्या-क्या।


बड़हर मन तो सबला आसानी ले कर लेही, बीच वाले मन तको धीरे-धीरे लाइन म आ जही। लेकिन फदक जही अनपढ़ गरीबहा मन। नतो मोबाइल जाने, न इंटरनेट। कइसे कैशलेस होही? मोबाइल अउ नेट डाटा कोन देही? सबले मुस्कुल तो डोकरी दाई अउ बबा के होही। आज समाज म भरोसा के आदमी घलोक तो नइये। जेने ल नंबर देबे तेने दूनंबरी कर देही तव। अम्मट ले निकल के चूररूक म परउल हो जही। नोटबंदी के फैसला के बाद ले आरबीआई ह कोनो कोती बाढ़ तव कोनो कोती सुक्खा के हालात बना दे हावय। उपराहा म आयकर ह लिमिट-लिमिट करत हावय तभो ले बैंक अउ एटीएम नो कैश के बोर्ड चिपकाये बइठे हाबे। बैंक के बाबू मन आगू एसी म माछी मारत राहय तेन मन उवत के बुढ़त कमावत खाताधारी मनला कोसत रइथे। करे कोनो अऊ, भरे कोनो अऊ।  10 प्रतिशत गद्दार के भगुतना ल 90 प्रतिशत वफादार मन भुगतत हावय। तभो ले गम नइये। कम से कम दूनंबरी करइया मनतो चेतही। चलव इही ओढ़र म डिजिटल हो जबो हम सब। अबही के बखत ल देखत रिलाइंस के जियो वाले मनके तको गुनगान करे बर परही काबर के अभी ऊंकरे डाबा भरे हावय। दुनिया ल काहत हावय जियो डिजिटल इंडिया, न गोठबात के पइसा न इंटरनेट के। फोकट म अनलिमिटेड 4 जी डेटा रिलाइंस वाले मन अपन जियो सिम म देवत हावय। आगू 31 दिसंबर के बंद ले होवइया रिहिसे फेर अब मार्च तक बाढ़गे। ठट्ठा करे के बेरा नइये नइते आरबीआई अउ आयकर देवता मन सो बिनती करत पहिली इही मांगतेन के अब 4 जी मोबाइल अउ जियो सिम कार्ड दे देवा...।




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20 Nov 2016

बिसरगे सुरता अदला-बदली ले निस्तार के

बिसरगे सुरता अदला-बदली ले निस्तार के : वस्तु विनिमय (barter)

तीस बछर पहिली हमर गांव म एक झिन नून बेचइया डोकरा आवय। बइलागाड़ी म एक गाड़ी नून धरके। ओकर डोकरी ह गाड़ी खेदत राहय अउ डोकरा हा गली म ऑक पारय- 'नून लेलव नून... एक काठा धान के दू काठा नून हो...।' ओकर आरो पाके गांव के सियानिन दाई मन टोकनी-टोकनी धान ल धरके घर ले निकलय अउ नून के बदला म धान ल देवय। नूनवाला डोकरा ह हमर गांव म महीना-पंदराही आवय। हमरे तिर-तखार के गांव मन ओकर गवई रिहिसे। नून बेचई म डोकरा के पूरा परिवार लगे राहय। कभू-कभू हाट-बजार म तको ओकर आरो मिलय-'नून लेलव नून... एक काठा धान के दू काठा नून हो...।'
अबही असन तइहा के सियान मन नोट के गठरी धरे बजार नइ जावत रिहिसे। अऊ आन-तान खरचा तको तो नइ रिहिस हावय। कुछू भी जिनिस लेना राहय तव सबेच ह धान-पान के बदली म मिल जाए। सियान बबा के थइला म पइसा देखेच नइ रेहेन। तभो ले नानपन म घर म सबोच सुख ल देखे हावन। चांउर-दार, तेल-हरदी, धनिया-मिर्चा, हरियर साग के दिन म हरियर-हरियर भाजी, अड़हा दिन बर खुला-सुक्सा। अमली, आम, आलू, भाठा, रमकेलिया, पताल के खुला, सुक्सा म चिवरा, चना, चनौरी मिलय। अब रइगे बात नून अउ गुर के तव नून ल जइसे नूनवाला डोकरा कना बिसावय धान के बदला म ओइसने छिंदी (सिंधी) दुकान म गुर तको धान के बदली म मिलय। तेल म भुंजे-बघारे वाला साग कमेच चुरय हालाकि हमर घर घानी तको रिहिसे, हाना तको किथे न 'तेली घर तेल रही त माहल ल नइ पोतय' तइसे बरोबर। बियारा म एक ठिन घानी गड़ेच राहय। बबा ह अपन पाहरो म अपनेच घानी के तेल खावय। घानी म तिली, सरसो, अरसी, करन, लीम अउ अंडी के तेल पेरय। घर के घानी ले तेल के तेल अउ ओकर खरी तको काम के राहय। फेर हमर दिन के आवत ले बबा ह घानी चलय बर छोड़ दे रिहिसे, हां बियारा म घानी ल गड़े देखे हाबन। रायपुर के नॉका म बड़का-बड़का घानी के पेराय तेल ल खावत रेहेन। घर के कोठा म राउत के दुहना नइ अतरत रिहिसे। एक्का-दुक्का के छेवारी उचेंच राहय। घरे म मही-दही अउ घीव मिलय। बस अइसने जइसे-तइसे दिन कटते-कटत आज सबोच ल पइसा म बिसाये के दिन आगे। 
बाहिर ले एक झन छिंदी ह गांव म आके दुकान खोलिस। हमरेच गांव के लोगन मन कना सामान बिसावये अउ हमरे कना बेंचय। फेर ओकर बेचे के तरीका आन रिहिसे। एकेच ठउर म सबोच जिनिस ल बिसावय अउ बेचय। ओहा न तो गांव के किसान रिहिसे अउ न ही बनिहार। गांव म घर न खार म खेत तइसे बरोबर लोटा-धारी धरे अइस अउ पटइल घर के ओसाही म दुकान जमाइस। जेन गांव म लोगन मन सामान के अदला-बदली करके निस्तारी करय उहां ओ छिंदी ह पइसा के लेन-देन शुरू करिस। धान के अलावा साग-भाजी अउ दलहन-तिलहन ल तको अपने ह पइसा म लेवय अउ गांव के लोगन मन कना बेचय। देखते-देखत सबो जिनिस अमोलहा के होगे।
जेन आदमी मन मउका परे म अपन घर के सामान ल बेंचय तेन मन फोकटे-फोकट बेच के पइसा सकेले के शुरू कर दिस। घर म होय उपज ल छिंदी के दुकान मन बेचय अउ बदला म पइसा ल सकेल के राखे राहय। वहू छिंदी हरेक चीज ल बिसावय। बड़का किसान मन धान, गहूं, तिवरा, चना, अरसी। छोटे किसान मन राहेर, मसूर, सरसो, उरीद अउ बारी के साग-सब्जी। जेकर घर किसानी लइक खेती नइ राहय तेनो मन खार ले आमा, अमली, तेंदू, चार के फर के संगे-संग करन, लीम, मउहा, अंडी अउ जलाऊ लकड़ी तको सकेलय। 
बनिहार अउ किसान मन एक दूसर के घर ले सामान अदला-बदली करके निस्तारी चलावय, फेर जब ले छिंदी के दुकान खुलिस हर सामान उहां पहिली पहुंचथे तेकर पाछू आन मन पाथे। बेचे-बिसाय के खेल म धीरे-धीरे गांव वाले मन ठंठन गोपाल अउ छिंदी होगे मालामाल। उपज के पाछू कतका मेहनत करे बर परथे येला कमइया के छोड़े अऊ कोन जान पाही। फेर ये मेहनत करइया के दुर्भाग्य आए के मोल ल दुकान अउ बाजार म बइठे बैपारी मन तय करथे। आगू जेन नूनवाला डोकरा ह एक काठा धान के दू काठा नून देवय ओही अब दू पइली देवत हाबे, माने धान के मोल आधा होगे। अइसने छिंदी तको वन उपज अउ फसल ल अठन्नी देके बिसाथे अउ रूपिया म बेचथे। कहू बीच म ये छिंदी नइ आए रितिस तव आजो हमन अपन खेत म उपजे फसल ल धरके जातेन अउ जरूरत के सामान लेके आतेन। आदला-बदली ले दिन बने बिततिस, रूपिया-पइसा बर हाय-हाय नइ करत रइतेन।  
जयंत साहू,
ग्राम-डूण्डा-वार्ड-52, रायपुर छ.ग.
jayantsahu9@gmail.com
9826753304

5 Nov 2016

दू रूपिया के चॉउर के गुन!

एक समे म अइसे गोठ गोठियावय सियान मन ह के दिल्ली ले पठोय रूपिया के चरन्नी भर ल हितग्राही मन पाथे। अऊ बाकी बारा आना ह बिचौलिया के ओली म रबक जाथे। फेर अब अइसन समय नइये, बखत के संग जनता जानगे के कोन ह हक ल मारत रिहिसे। बीच के बिचौलिया मन चिनहउ होवत हावय, नाव धराय म जेल कोति ढकलावथे। जब तक देश म कानून जिंदा हावय अउ जनता के सक चलत हावय आन ह हक ल नइ मार सकय। अब आम जनता बर चलत विकासकारी योजना के लाभ ह चरन्नी-अठन्नी ले बारा आना तक दिखत हावय। ओ दिन दुरिहा नइये जब जनता ह अपन नेता ले सोला आना काम कराही। कर्मचारी मन ईमानदारी ले अपन-अपन जवाबदारी निभाही। चारों मुड़ा खुसहाली छाही। प्रदेश ह विकास के निसैनी म दिनों-दिन चघत फिलिंग ल छुही। फेर का छत्तीसगढ़ के जनता के जागरूकता अउ नेता मनके बेवहार ले अइसे लागथे के जनता सिरतोन म जागे हावय? अलग राज बने सोला बछर होगे हवय तभो ले छत्तीसगढ़िया मन फोकट के दार-चॉउर-नून म जियत हावय। का इही हैसियत हावय छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़िया मनके? अइसन मउका म छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के एक जुमला सुरता आवत हावय ओमन इहा के आम आदमी ल काहय 'अमीर धरती के गरीब जनताÓ। सोला बछर के छत्तीसगढ़ म पहिली अजीत जोगी के सियानी म कांग्रेस पार्टी ह सत्ता के सुख भोगिस। तीन साल बाद जब चुनई अइस तब नवा छत्तीसगढ़ देवइया अटल जी के छवि के सेती भाजपा बहुमत म आगे अउ डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री बनगे। रमन सरकार ह तो जोगी के जुमला के परिभाषा ल बदल दिस। जनता ल बड़े-बड़े सपना देखना सुरू कर दिस। छत्तीसगढ़िया किसान मनला गरीब-गरीब कहिके फोकट म समान बॅटई शुरू होगे। दू रूपिया के हिसाब ले एक परिवार ल 35 किलो चॉउर, फोकट म नून। फोकट के राशन खाए के आदत डारके इहां के लोगन मनला कोढ़िया, जुआंरी अउ नशेड़ी बनइया सरकार ह छत्तीसगढ़िया मनके कतका पीढ़ी ल तारही अउ गरीब के ओढ़र म जेब भरइया मनके कतका पीढ़ी ह तरही ये उही जाने। सरी दुनिया म धान कटोरा के नाव के चिन्हारी धरे अपन मेहनत के दंभ भरइया छत्तीसगढ़िया मन फोकट के चॉउर म मोहागे। सरकार के ही आंकड़ा बताथे के रिकार्ड तोड़ धान के पैदावार छत्तीसगढ़ म होवथाबे तव फेर राशन दुकान के चॉउर खाये के नौबत काबर आवत हाबे। राशन दुकान के दार-चॉउर खावथे अउ सरकार के गुन गावथे। नेता मन तको जानगे के छत्तीसगढ़िया मन फोकट-फोकट के ल ज्यादा देखथे। चुनई जीतना हे तव चार फोकटइहा योजना चलाओ, जनता ल मोहाओ अउ सरकार बनाओ। ए सरकार के कम किम्मत म चॉउर बांटे ले कतकोन गरीब के भला तको होवत हावय ये बात ल सहरावत दूसर कोति देखे जाए तव बड़ भारी नकसान तको होवथाबे। आन के आगू हम भूखा-नंगा, ररूहा होगेन। जबकि छत्तीसगढ़ म अतेक गरीबी नइये के कोनो भूख म मर जही। अन्नपूर्णा के दिये छत्तीसगढ़ म सब कुछ हवय। धन-दौलत ले ज्यादा तो लोगन म भोलापन हवय। जेकर फायदा नेता मन उठावत हवय। पांच साल म एक पइत खीर खवाके वोट बटोरथे, बाकी दिन पसिया ल चटाथे। जेन मन किथे के छत्तीसगढ़ म गरीब मनके कल्याण खातिर सरकार बने काम करत हावय ओमन एक पइत ग्रामीण अंचल ल किंजर के जरूर देखय फोकटइहा योजना के पै उघर जही।

jayant sahu_जयंत

सोचथवं अब राजनैतिक चारी—चुगली ले दुरिहा रइहवं, फेर आए—भाए देखके सहन तको नइ होवय। सहमत होहू त पंदउली दव। अउ बने लागही तव आसिस दव, नइते सुझाव।
जयंत साहू
डूण्डा वार्ड—52, रायपुर छत्तीसगढ़
jayantsahu9@gmail.com
9826753304

10 Oct 2016

सत्ताधारी की बलिहारी

आईएएस अफसर माने प्रशासनिक तंत्र के आधार स्तंभ, जेकर कुशलता अउ विवेक ले कार्यपालिका सुचारू रूप ले संचालित होथे। अब अइसन जिम्मेदार व्यक्ति मन कुछू कहिथे तव जरूर ओमा कुछ तथ्य राहत होही, मुद्दा म गंभीरता राहत होही तभे बात उठते। आन आदमी मन सहिक आईएएस अफसर मन तको सोशल मीडिया म मन के बात ल पोस्ट, लाईक अउ कमेन्ट करथे। लेकिन कुछ लोगन मन ऊंकर बात ल अपन नजरिये से सोचथे अउ बिगर तर्क-वितर्क के ही विवाद के विषय बना देथे। सबो ल शायद सुरता होही कुछ समे पहिली के डॉ. जगदीश सोनकर के गोठ ह, जेन म ओकर एक अस्पताल के निरीक्षण करत बखत मरीज के पलंग म गोड़ राखके गोठियाये के फोटो अउ खबर ले अफसर के कार्यशैली उपर विवाद खड़ा करे गे रिहिसे। सोचे के बात रिहिसे के का ये अफसर के आदत म शामिल रिहिस के ओमन गरीब के खटिया म अपन जूता मड़ाथे। राज्य के एक अऊ जिम्मेदार अफसर एलेक्स पाल मेमन तो न्यायपालिका उपर ही सवाल खड़ा कर दे रिहिस हावय। दूनो अफसर उपर राजनीति करइया मन बेलगाम होय के बात करत सरकार कना कड़ा कार्रवाई करे के दबाव बनाये रिहिन हाबे। अइसन बखत म आईएएस अफसर मनके संगठन तको अलग-थलग हो जथे। अभी हाल ही म एक अउ 2012 बैच के आईएएस अफसर शिव अनंत तायल ह सोशल मीडिया के टिप्पणी ले विवाद म फसत दिखत हावय। ओमन अपन फेसबुक म पं. दीनदयाल उपाध्याय के बारे म लिखे रिहिसे के पंडित दीनदयाल कोने..? लेखक या विचारक के रूप म ऊंकर एको ठन अइसे काम नइये जेकर ले ओकर विचारधारा ल समझे जा सकय..। ओमन तो चुनाव तको नइ लड़े हावय..। अइसन काखरो बारे बिना जाने बोलना अउ लिखना जरूर गलत हावय फेर ओमन तो खुदे काहत हावय के मोला जानकारी नइये अऊ जाने खातिर लिखे हाबवं। एक आम आदमी होतिस त भले माफी मिल सकत रिहिसे फेर इहां तो दूनो पक्ष पावरफूल हावय। एक आईएएस अफसर ह भाजपा शासित राज्य म नौकरी करत उंकरे प्रेरणस्त्रोत, मार्गदर्शक अउ विचारक, सियान के उपर टिप्पणी करे हावय। वहू अइसन समे म जब राष्ट्रीय स्तर म पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशती समारोह मनाये के तियारी चलत हाबे। नवा राजधानी म जबर मूर्ति के अनावरण होवइया हाबे। केन्द्र अउ राज्य दूनों म भाजपा के शासन हावय अइसन म अफसर उपर कड़ा कार्यवाही तको हो सकत हावय। यदि कड़ा कार्यवाही होही तव आईएएस अफसर मनके एक गुट म ये संदेश जाही के आंखी-कान मुंदे कलेचुप सत्ताधारी मनके झंडा तरी काम करव नहीं ते नेता जी के डंडा चल जही। सत्ताधारी मनके आगू तो लोकतंत्र, संविधान अउ कानून जइसन शब्द बेबस दिखथे। इही मन जब विपक्ष म बइठे तव लोकतंत्र, संविधान अउ कानून के अतेक बड़े-बड़े व्याख्या करथे के रामचरित मानस तको छोटे जनाथे। अऊ सत्ता पाये के बाद कार्यकर्ता रूपी महाकवि, महाऋषि, महान विद्धान मन सिरिफ अपने-आप ल ही महिमामंडित करत रिथे। लोकतंत्र, संविधान अउ कानून ह महामंडलेश्वर नेताश्री के तकिया तरी चपकाये देखके ऊंकर पार्टी के टेटपुंजिया कार्यकर्ता मन तको क्लास वन अफसर के औकात रखथे, ओ चाहय तो आईएएस अउ आईपीएस मनला तको फटकार लगा सकथे। शायद इही पाके जेकर शासन चलथे, तेकरे छोटे-बड़े सबो कर्मचारी मन जयकारा लगाथे।                    
JAYANT_जयंत साहू
9826753304

27 Sep 2016

नाचा: नचकारिन के मोंजरा अउ शेरों-शायरी

नाचा म अतेक अकन विशेषता हवय के शोध करइया मन ले पूरा युनिवर्सिटी(university)खचाखच हो जही। अबतक छत्तीसगढ़ के नाचा उपर म कोन-कोन ह पीएचडी(ph.d) करे हावय तेकर पूरा-पूरा जानकारी नइये फेर एशिया के सबले बड़का संगीत विश्वविद्यालय म (indira kala sangeet vishwavidyalaya) गजब झिन मन लोककला ले डॉक्टरेड के उपाधी पाये हावय। कतकोन के नाचा उपर शोध के काम चलते हावय। 
खड़े साज ले नाचा के शुरूआत होय रिहिसे किथे तइहा समे म। हमन तो खड़े साज के समे म पैदा नइ होय रेहेन। अब के नाचा देखथन तब जोन हमर आगू म होथे अऊ जोन हो चुके हावय तेकर कल्पना करत तुलना करन तब हमर पाहरो के हिसाब ले वोला परिवर्तन केहे जाही काबर के हम आज के स्वरूप ल देखत हाबन। सियान मनके पाहरो म का होवत रिहिस, येला उहीच मन जानही। केहे के मतलब का नंदाय हावय अऊ का-का नवा सवांगा म आए हाबे तेकर फरक ल जेन दोनो जुग ल देखे हाबय तेकर कना गोठियाये ले ही पै उघरही। इही सेती नाचा के कलाकार के जीवनी(Family life of artists), नाचा के संगीत(music), पहनावा(costume), नाचा के प्रमुख वाद्य(Instrument), नाचा के पात्र(Character) आदि के विषय म अलग-अलग शोध करे के जरूरत हवय। 
गांव कोति अभी घलोक नाचा के लोकप्रियता खतम नइ होय हावय। मंगल उच्छाह के बेला म रातभर नाचा के प्रोग्राम चलत रिथे। फेर रायपुर शहर म नाचा नहीं के बरोबर होथे। पाछु दिन शहर के रंगकर्मी निसार अली के सियानी म नाचा के कार्यशाला के आयोजन संस्कृति विभाग परिसर म राखे गे रिहिसे। शहर के आम जनता म तो ज्यादा रूची नइ दिखिस फेर खास दर्शक मनके रोजेच हुजूम लगे राहय। सबोच ह निसार अली के काम के बड़ई करिन। ओमन नाचा के सरी विधा के जानकारी लोगन ल देवाय के उदीम बेरा-बेरा म करते रिथे। कुछ दिन बाद 'रंग हबीब' के नाव ले फेर वृंदावन हॉल म नाचा देखे के अवसर मिलिस मउका रिहिसे नाचा ल देश-विदेश के कला जगत के फिलिंग म पहुंचइया हबीब तनवीर के जनम दिन के। जइसे के हम आगू गोठियाये रेहेन के दू आखर के नाचा ह डबरा अउ तरिया नहीं बल्कि विकराल सागर आए इही पाके एकक विधा उपर चर्चा करना ही ज्यादा उचित होही। आन के जुबानी गम्मत, पहनावा, संगीत उक के बारे म सुनतेच रिथन। अब हम सिरिफ नचकारिन (Dancer) अउ ऊंकर मोंजरा के विषय म गोठ करबोन।
...'अई इहां के रहइया नोहय... धमतरी तिर कुरूद ओकर गांव, तिर म बलाके दस के नोट दिस अऊ दसरू मंडल ओकर नाव।'
...'हां तो ये श्रीमान जी है रायपुर वाले श्री कार्तिक राम साहू जी, इनकी तरफ से हमारी पार्टी को पचास रूपये की सम्मान राशी मिली है हम उनका अपनी पार्टी की ओर से शुक्रियादा करते है...करते है...करते है...।'
डांसर मन शायरी बोलथे तव उंकर अंजाद गजब के होथे। ओमन ला चार-चार लाइन के गजब अकन शेर याद रिथे। ये बात अलग हे के रचना काखर आए तेन उहू मनला मालूम नइ राहय।

...'छोटे से दिल में अरमान कोई रखना,
दुनिया की भीड़ में पहचान कोई रखना, 
अच्छे नहीं लगते जब रहते हो उदास, 
अपने होठे पे सदा मुस्कान वही रखना।'
... 'तोड़ दो ना वो कसम जो खाई है,
कभी कभी याद कर लेने में क्या बुराई है,
याद आप को किये बिना रहा भी तो नहीं जाता,
दिल में जगा आपने ऐसी जो बनाई है।'
...'बड़ी हसीन थी जिन्दगी,
जब ना किसी से मोहब्बत ना किसी से नफरत थी,
जिन्दगी में एक मोड़ ऐसा आया मोहब्बत उससे हुई,
और नफरत सारी दुनिया से हो गयी।'
...'दिल का हाल बताना नहीं आता,
किसी को ऐसे तड़पाना नहीं आता,
सुनना चाहते हैं आपकी आवाज,
मगर बात करने का बहाना नहीं आता।'
डांसर मन मोंजरा लेके बाद पइसा देवइया के नाव ल अपन अंदाज म अइसे लेथे के पइसा देवइया के दिल खुस हो जथे। शेरों-शायरी के संग मोंजरा देवइया के फरमाइस तको आथे जेन ला डांसर मन पूरा करथे। 
'...मैने प्यार तुम्ही से किया है... मैने दिल भी तुम्ही को दिया है'
'...कोयल सी तेरी बोली, कू कू कू, नैन तेरे कजरारे'
'...चाँदी की दीवार न तोड़ी, प्यार भरा दिल तोड़ दिया
इक धनवान की बेटी ने, निर्धन का दामन तोड़ दिया'
'...दो दिल मिल रहे हैं मगर चुपके चुपके
सबको हो रही है, खबर चुपके चुपके'
'...दिल में तुझे बिठाके,  कर लूँगी मैं बन्द आँखें
पूजा करूँगी तेरी,  हो के रहूँगी तेरी'
'...मैं क्या करूँ राम मुझे बुड्ढा मिल गया
हाय, हाय बुड्ढा मिल गया
मैं गुड़िया हसीन मेरी मोरनी सी चाल है
सर में सफ़ेद उसके दादा जी सा बाल है
बिगड़ेगा हर काम मुझे बुड्ढा मिल गया
मैं क्या करूँ राम मुझे बुड्ढा मिल गया'
हम इहा फिल्मी गीत के पंक्ति नइ लिखत हाबन बल्कि ये ह नोट के बदला म डांसर मनके मुख ले निकले गीत आए। मंच म नारी संवागा करे पुरूष कलाकार, माने नाचा के डांसर मन दर्शक मनक बीच जाके मोंजरा झोकथे। येमन मंच म एकेच झिन नइ राहय बल्कि तीन-चार झिन रिथे अउ दर्शक कोति बरोबर नजर राखे रिथे के कोनो कोति ले रूपिया देखाही ताहन टप ले दऊड़ के जाना हवय किके। एक डांसर बीच म गाना ल छोड़के मोंजरा लिये खातिर जाथे तव दूसर डांसर गीत ल पूरा करत रिथे। मोंजरा वाली के मंच म आते ही गीत रूकथे अउ ओमन मोंजरा देवइया के नाव लेके शुक्रियादा करथे। नाचा के डांसर मनला सबो प्रकार के गीत मनके जानकारी होथे जुन्ना फिल्मी गीत के संगे-संग जोन भी नवा फिलिम या ओ बखत जोन चलत रिथे तेकरो गीत ओमन ल गाए बर आथे। ओमन शायरी तको गजब के बोलथे। एक नाचा के डांसर के गाये गीत म मूल गीत ले अलगेच प्रस्तुतिकरण होथे तभो ले ओमा मीठास रिथे। शायरी म व्याकरण अउ भाषा के कमी ल आंचलिकता के खुशबू ह दूर कर देथे। अनपढ़ कलाकार मनला गीत अउ शायरी ह मुखग्र होना, फिल्मी गीत, डिस्को, भजन अउ कव्वाली के संगे-संग लोकगीत के समझ अउ गायकी के पकड़ रखना ममूली बात नोहय। दस रूपिया के सम्मान राशी देके डांसर मनले मनपदंस गीत सुनना हमर लिये साहज बात आए फेर कभू-कभू डांसर मन असहज हो जथे जब ओमन के पाला कोनो शराबी अउ उपई दर्शक ले पड़थे। तिर म बलाके आन-तान कहि देथे, अलकरहा गीत के फरमाईस कर देथे। जइसे के हिन्दी फिलिम 'खलनायक' के सुपर हिट गीत कहे जाने वाला 'चुनरी के नीचे क्या है... चोली के पीछे क्या है।' के दौर म गजब चले रिहिसे। हजारों के भीड़ म एकाते अइसन दर्शक मिलथे जोन अभद्र व्यवहार करथे। 
मोंजरा लेना अउ देना लाखों नाचा के दिवाना मनके लिये सम्मान राशी आए, ऊंकर कला के प्रोत्साहन आए। नाच के पइसा कमाना, दर्शक के थइली ले पइसा झोरना मोंजरा के उद्देश्य नइ राहय। अब बात नाचा के मोंजरा लेवई-देवई के मउका के करे जाए तव नाचा म गम्मत शुरू करे के पहिली सिरिफ डांसर मन कोति ले करे जाथे। सुघ्घर नव युवती के सिंगार करे युवक कलाकार मन नृत्य अउ गीत के अइसे अद्भुत समां बांध देथे के दर्शक बइठे ठउर ले उठे नइ सकय। इहां ये बात बताना जरूरी हावय के डांसर मन कोनो गम्मत के पात्र होथे तव ओमन मोंजरा नइ लेवय। थ्येटर कलाकार बरोबर अपन पात्र म रमे रिथे। नाचा के शुरूआते म ज्यादा चलथे मोंजरा लेवई अउ देवइ के कार्यक्रम। डांसर मन मंच म जादा समय लेवत हावय येकर मतलब ये होथे के मंच के भीतर म कोनो गम्मत के तियरी होवत हाबे। इही पाके डांसर मन मंच म दर्शक ल बांधे राखे रिथे। जइसे ही कोनो गम्मत सुरू होथे ये डांसर मन मोंजरा अउ गीत फरमाइस ल बंद कर देथे अउ रम जथे गम्मत म।
जयंत साहू, रायपुर
jayantsahu9@gmail.com
9826753304

9 Sep 2016

तिहरहा खरचा ले कोठी सिहरगे

एक तिहार के सगा झरन नइ पाये के ठउका दुसर तिहार लकठा जथे। अभी भइगे ओरी-ओरी तिहारे मनई चलत हाबे। काम बुता कहुं जाए तिहार मनाना जरूरी होगे हावय काबर के परोसी मनावत हावय। तिहार मनई म तो हमर छत्तीसगढ़ अऊ सबले अउवल होगे हाबे। हरेक पाख म एक ठिन तिहार धमक जथे। आज तो खरचा के गोठ करेच बर परही भले लोगन गंगु तेली काहय। थइली भरन नइ पावे खरचा पहिलिच ले, लागथे इही सब खरचा उठाये बर सियान मन बड़े-बड़े कोठी बनाये हाबे। पाख-पाख म तिहार तभो ले लोगन म भारी उच्छाह हाबे। आन काम बर एकात कन कंझाही, काय घेरी-बेरी किके। फेर तिहार बर थोरको नइ असकटावे। ये तिहार ओ तिहार ह बपरी माईलोगिन मन ला जियानथे अऊ बपरा कोठी ल। आदमी का एक दिन के तिहार ल तको हफ्ताभर मान देथे। यहू बात वाजिब हावय के इही तिहार मन तो हमर पहिचान आए। परब ले ही लोकांचल ह अलग चिन्हारी पाथे, आन प्रदेश के आगू हमर नाक ल ऊंचा करथे। सब कना हमन अपन लोक संस्कृति अउ परंपरा के डिंग मारथन। होली ले हरेली तक कुद-कुद के खायेच बर तो शायद कोठी ल भरे रिथे जांगर टोर मेहनत करके। कृषि प्रधान अंचल म खेती ले जुरे परब मन बेरा-बेरा म आके मेहनत करइया के जांगर ल सुकून देथे अउ इही बहाना नता रिस्तेदार ले मेल-मुलाकात तको होथे। इही पाके हम तिहार मनाये के कदापि विरोध नइ करन फेर लोगन आज जोन तिहार के ओढ़र म बाजार के संस्कृति ल आत्मसात कारत हाबे ओकर विरोध करना जरूरी हावय। तइहा म हमर सियान मन तको तिहार मनात रिहिन फेर अतेक देखावा नइ रिहिसे। सादगी ले सुंदर परंपरा के निर्वाह करय। आजकल के परब-तिहार के जोश अउ उंमग सिरिफ एक दिखावा होगे हाबे। लोक परब म पूरा-पूरा बाजार के कब्जा होवथाबे इही पाके अब लोक ह विलोप होके 'बजरहा परबÓ के रूप ले डारे हवय। तीज-तिहार के गढ़ कहे जाने वाला छत्तीसगढ़ के 'बजरहा परबÓ के फायदा बाजार ह उठावत हाबे। तइहा के सियान मनके तिहार जोंगे के पै आन रिहिसे। अब बैपारी मन तय करथे तिहार के मरम ला, कोन से तिहार म का करना चाही? कइसे मनाये ले देवता परसन होथे अउ कोन मुहरत म खरीदारी करना चाही। एक बैपारी ह दुकान के बिक्री ल देख के तिहार के रौनक ल बताथे के तिहार कइसे बुलकिस। बैपारी मन अपन फायदा बर लोक परंपरा के मुह ल मोड़ दिस। आज बाजार म जाके देखे जाव तव जेन मन छत्तीसगढ़िया मनके संस्कृति अउ परब के जिनिस के दुकान सजाये हाबे ओमन स्वयं आन राज के संस्कृति ल मानथे। छैमसी परब के संस्कृति ल मानने वाले मन कइसे पाख-पाख म तिहार मनइये के ढोंग करत परे के कोठी उरकावत हावय। एक घड़ी चेत करके देखव तो के हमन तो तिहार मनई म फदके हाबन तव फेर जेन आदमी मन दुकान खोले बइठे हाबे तेन मन कोने? हां ठउका चिनहे ओमन बैपारी आए। अब बैपारी के केहे मुताबिक तिहार मनाना हे या जुन्ना सियान के मुताबिक येला लोगन ल सोचना हाबे। हम कंजुसई अउ खरचा म कटौती के गोठ नइ करत हाबन काबर के छत्तीसगढ़िया मन करा तो अनधन के भंडार भरे हवय। मेहनत करइया के जांगर जिंदाबाद, बउरे ले बटलोही के पेंदी खियाथे फेर हमन तो कोठी-डोली वाले आन। सिरिफ फोकट के देखावा ले दुरिहा रहना हाबे, अपन संस्कृति अउ परंपरा ले परब मनाना हाबे बिना काकरो नकल करें।   
                        
 * जयंत साहू*
JAYANT SAHU
-DUNDA, RAIPUR CG-492015
jayantsahu9@gmail.com
9826753304

18 Aug 2016

अस्पताल म गोड़ मड़ाय के ठउर नइये, दवई दुकान कचाकच


सम्मत के जर आए धन खान-पान के असर ते जेन अस्पताल म जाबे तिहेच मनमाड़े भीड़ पेले रिथे। अस्पताल ल ठउर-ठउर म खोले डॉक्टर मन गरीब ल देखते ही ठोमहा-ठोमहा दवई ल देके खून जांच, पेशाब जांच, अऊ ऐ जांच ओ जांच के पर्ची थमहा देथे। अस्पताल तो अब अइसे होगे हाबे जानो-मानो चाय-पान के दुकान, हरेक गली म एक ठन मिलही। आन देश के मन किथे के इहां के लोगन मन गरीबी अउ बीमारी म ज्यादा मरथे। ए सोचे के बात आए के अतेक बड़े-बड़े अस्पताल अउ डाक्टर होय के बावजूद बीमारी म लोगन मरत हावय। अरबों-खरबों रूपिया गवां के गरीब मन खातिर सरकार ह कल्याणकारी योजना चलावत हावय, तभो भूख ले कइसे मर जथे अऊ जेन गरीब भूख ले बांचगे वो बपरा ह नानकून बीमारी म मर जथे। जब आदमी के काल आथे तव ओला मउत ले कोनो नइ बचा सकय। फेर अब जबकि चिकित्सा विज्ञान ह अपनेच मुंह ले आगर के घाघर गोठियावथाबे के हमर कना हरेक बीमारी के दवई हाबे त ये बात कोति घलोक सोचे पर परथे के का ओ दवई के असर अमीर अउ गरीब उपर आने-आने होथे। कतकोन शहर म तो समे म उपचार अउ दवई-बुटी के बने बेवस्था होय के बाद घलोक बीमारी अउ बीमरहा मनके संख्या दिनों-दिन बाड़त काबर हावय। पहिली घलोक बीमारी होवत रिहिसे, उपचार तको होवय। समे के मुताबिक धीरे-धीरे उपचार के तरीका ह बदलत हावय। अब जेन झिन डाक्टर ते ठिन दवाई, उहू म जीव बांच जही येकर कोनो गारेंटी नइये। आदमी मरे चाहे बांचे डाक्टर के पूरा फीस देना जरूरी हावय। मरीज मरगे त ओकर घरवाले मन अस्पताल के पूरा खर्चा देही तभे लाश ल उठाही, अइसन हवय अब के उपचार व्यावस्था अउ डॉक्टर मनके नीति। 
सरकार किथे इलाज के आभाव म काकरो मउत नइ होना चाही, सबला बने उपचार मिलय। फेर इहां तो बने इलाज सिरिफ बड़हर बर हावय। जेकर कना रूपिया पइसा हावय ओमन बड़े से बड़े बीमारी ले उबर जथे अऊ जेकर कना इलाज कराय बर पइसा नइये ओमन सर्दी-खासी म तको ढलंग जथे। माने तोर करा पइसा हवय तव सब इलाज होही वरना भगवाने जाने तोर का होही? आयुर्वेद, योग, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा, सिद्धा, होम्योपैथी, स्थानीय वनौषधि, जड़ी-बूटी अउ योग विज्ञान ले आगु लोगन के उपचार होवय। अब सबले ज्यादा ऐलोपैथी के बोलबाला हावय। आदमी के दिनचर्या म शामिल होगे हावय दवई ह। ए गोली मनके पहुंच दवई दुकान ले गांव के किराना दुकान तक होगे हावय। दुनिया म अइसन कोनो आदमी नइ बांचे होही जेन बिन दवई खाये जियत होही। लइका ह महतारी के गरभ म रिथे तभेच ले ओला विटामिन, प्रोटिन अउ कैल्शियम के टेबलेट के आदत हो जाये रिथे, तब बाहिर आये के बाद कइसे ओ लइका ह बिगर गोली दवई के भला-चंगा रइही। बात-बात म डॉक्टर अउ दवई के देखे तो अइसे लागे लागथे मानो दवई बनइया अउ डॉक्टर मन मिलके हर आदमी ल गोली-दवई के आदी बनावत हावय। दुबर-पातर ल मोटाय के दवई, मोट-डाट ल पतराये के। बाल झड़ाय के, जगाये के। बीमारी के हउ्वा ले आज देश म गोली-दवई के बाजार अतेक फूलत-फलत हावय के जेन ल कुछूच बीमारी नइये तेनो हा मोला कुछू बीमारी झिन होतिस भगवान किके बने-बने रेहे के दवई ल खावत हाबे।  
 ( जयंत साहू )
JAYANT SAHU
ward-52, Dunda, post-Sejbahar, Raipur CG
9826753304
jayantsahu9@gmail.com

9 Jul 2016

चलना तोला रइपुर घुमाहूं सनिमा देखाहूं अउ भजिया खवाहूं!

छत्तीसगढ़ म एक ठन अऊ नवा गजब के योजना के आरो मिले हावय जेकर नाव हे 'हमर छत्तीसगढ़Ó। ये योजना म गांव-गांव के नेता, माने पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधि मनला रायपुर घुमाये जाही। सरकारी खर्चा म पंच, सरपंच अउ सचिव मन डपट के राजधानी घमुही, सनिमा देखही अउ रिसोट म भजिया खाही। पाछु दिन दुर्ग संभाग के तीन जिला के पंचायत प्रतिनिधि मन राजधानी के नया रायपुर म मंत्रालय, मुक्तांगन, घासीदास संग्रहालय, जंगल सफारी, सांइस सेंटर, कृषि विश्वविद्यालय देखिन अउ रात के लोकरंग अर्जुन्दा वाले मनके प्रोग्राम देखिन। येमा दुर्ग के 167, बेमेतरा, नवागढ़, बेरला के 167 अउ बालोद के 166 निर्वाचित जनप्रतिनिधि सामिल रिहिसे। गांव म अभी नंगत खेती-किसानी के बुता फदके हावय अइसन म सरकारी फरमान तो मानेच ल परही। सरकार ल अभीच राजधानी देखाय के का सुझिस ते उही जाने। गांव के लोगन मन सियानी पागा बांध के पंचायत म आगे हावय येकर ये मतलब नइये के गांव के नेता मन करा घलो करिया रंग के स्कार्पियो या फेर मारूती-होन्डा होही। पंच अउ सरपंच मन रोजी-मजूरी करके अपन अउ परिवार के पालन-पोसन करथे। कतकोन पंचायत के प्रतिनिधि मन तो आन राज म बनि कमाय बर तको जाथे। सरकार ह अइसने पंचायत प्रतिनिधि मन बर हमर छत्तीसगढ़ योजना लाने हावय। सरकार ल लागत होही के हमन राजधानी म बड़ भारी काम कर डारे हाबन, मानो ये धरती हा सरग बरोबर संवरगे हवय। ये योजना के चित अउ पट दूनो ल देखे जाए तव सरकार ह चित होवत दिखत हावय। गांव के पंच, सरपंच मन राजधानी आके नवा-नवा गियान के बात नइ सीखय नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के सरकार के उपलब्धि ल देखही। डॉ. रमन सिंह अपन तीसरइया बछर तक पहुंचे के बाद का का काम करे हावय जनता खातिर इही देखाय के योजना आए। अइवइया पारी के अभी ले तियारी चलत हावय। पाछू महीना म जब लोक सुराज के आयोजन होय रिहिसे ओ बखत जब सरकार गांव-गांव म बइठिस तब सरकार के प्रति जनता के असल चेहरा दिखे लगगे। हमर छत्तीसगढ़ योजना ल पूरा-पूरा चुनावी परपंच कारर देके गजब अकन तथ्य हाबे। ये उही छत्तीसगढ़ आए जेन ल एक एजेंसी ह गरीब राज्य केहे हाबे, ये उही छत्तीसगढ़ आए जिहां के लोगन मन दू रूपिया के चाऊर अउ फोकट के नून खाथे। कुल मिलाके केहे जाए तब इहां फोकट-फोकट वाला योजना जादा चलथे, तव फेर सरकार ह कोन मुंह ले अपने गुनगान करत विकास के सरग ल अमरत हावय। जनता ल अब चुनई म वोट देके अलावा अऊ कुछुच काम करे के जरूरत नइये। मति अनुसार अब तो अनुमान लगाये जा सकथे के अवइया चुनई म सरकार ए घोसना कर सकथे के आप सिरिफ हमर सरकार बनन दव। फेर तुमन ला कुछू करे के जरूरत नइये। सब कुछ सरकार करही। चाऊर-दार के जोखा, लोग-लइका के जतन अउ तिरथ-बरथ तको सरकारी खरचा म होही। मंदिर-मस्जिद म जाके देव-धामी पूजन के बजाय नेता जी के जय बोलो, वो सबके मुराद पुरा करही। अभी आवव... रइपुर घुमाबो, सनिमा देखाबो अउ होटल-मोटल-रिसॉट म आनी बानी के जेवन खवाबो मन भर के इही तय 'हमर छत्तीसगढ़Ó। 
 * जयंत साहू*
jayantsahu9@gmail.com
9826753304
( येहा लेखक के स्वतंत्र विचार आए येमा कोनो राजनैतिक टिप्पणी नइ होय हाबे ​बल्कि एक आम आमदी के पक्ष ल राखे गे हावय। कोनो—कोनो के मन म कुछ-कांही उमड़ही तव नीचे कमेंट बाक्स म लिख दिहव। जय जोहार...  )

5 Jun 2016

मिशन 2018 बनाम क्षेत्रीय दल

छत्तीसगढ़ म अब अवइया विधानसभा चुनाव कोनो भी पार्टी बर सत्ता तक पहुंचना आसान नइ होही तइसे लागथे। काबर के अब क्षेत्रीय पार्टी वाले मन अपन पैठ बनाये के शुरू कर दे हाबय। छत्तीसगढ़ राज बने के बाद कॉग्रेस ल राज करे के अवसर मिलिस। तीन साल तक सत्ता म रेहे के बाद भी जनता ऊनला नकार दिस। कारण ये नइ रिहिस के जनता खातिर कॉग्रेस काम नइ करिन, बल्कि अटल सरकार ह छत्तीगसढ़ ल अस्तित्व म लानिस तेन पाके भाजपा कोति लोगन के जादा लगाव रिहिसे। जबकि छत्तीसगढ़ ल पहिली मुख्यमंत्री के रूप म एक अनुभवी राजनेता अउ कुशल प्रशासक मिले रिहिस अजीत जोगी के रूप म। जोगी जी 20 साल ले प्रशासनिक महकमा म काम करे के बाद 14 साल केंद्र के राजनीति म रेहे हे। अइसन मुखिया ह प्रदेश ल कहां ले कहां ले जा सकत हावय। फेर का करबे ओकर कुटिलता हर कुशलता उपर कालिख पोत देथे। जेती देखव तेती मिहिच-मिही के चक्कर म आज तक सत्ता म नइ आ सकत हावय। जोड़-तोड़ म तीन-पांच हमेशा फलित नइ होवय, पासा उलट देथे जनता।
बारा साल ले सत्ता म काबिज रमनसिंह के सरकार तको वोट के दम सत्ता म हावय अइसे बात नइये, छत्तीसगढ़िया मनला फोकटू राम बनाके चुनई तिरियाथे ताहन चाऊर फोकट म, दार फोकट म, नून फोकट म बांट-बांट के मोह देथे। भाजपा सरकार ह मेहनत कस छत्तीसगढ़िया मनला पूरा कोड़िया बना दीस। चार आन धरा के बारा आना के चूना लगाने वाला काम होवथाबे। पहिली ओकर काम संहराये के लइक लागिस। फेर जब धीरे-धीरे लोगन न पता चलिस के फोकट के लालच म हमला भोंदू बनाके हमरे घर म हमी ल मेहमान बनाये के काम होवथे तब आंखी उघरत हावय। लोगन सब देखत हावय के कोन छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़िया मनके हित के बात करथे अऊ कोन-कोन परदेसिया मनके समर्थन करथे। जनता कना आन दूसर रद्दा नइ रेहे के सेती बाहरी मनला अगुवा बनाके ऊंकर गुलामी करथे। जब-जब चुनई आथे लोगन इही गुनत किथे के कोन जनी कब छत्तीसगढ़िया के हाथ छत्तीसगढ़ के सत्ता आही। 
जनता फेर इहां दुविधा म हावय छत्तीसगढ़िया नेता के हाथ म सत्ता आ भी जही तव कोन काम के, पार्टी तो आखिर उहीच रही। केंद्र म ओकर रिमोट रही जइसे-जइसे दबही तइसे-तइसे काम होही। इही पाके क्षेत्रीय पार्टी उपर लोगन के अब नजर लगे हावय। फेर का करबे इहां भाजपा अउ कॉग्रेस के अलावा आन पार्टी वाले मनके एको सदस्य विधानसभा तक नइ पहुंचे हावय। हां अपन-अपन क्षेत्र म सक्रिय जरूर हावय अउ जनता के बीच काम तको करत हावय। 
छत्तीगसढ़ राज्य बने के बाद अस्तित्व म आए बहुत अकन छोटे-छोटे क्षेत्रीय पार्टी मन अंडरग्राऊंड बैटिंग करत हावय। ओमन अब आगु आके मैदान म खेलही तभे बड़े-बड़े मनके कस टुटही। अलग-अलग बिखरे हावय तेन पाके दम कम लागत हावय लेकिन जेन दिन सबो क्षेत्रीय पार्टी के वाले मन गठबंधन करके मिशन 2018 चलाही तव ये निश्चित हवय के छत्तीसगढ़ ले गैर छत्तीसगढ़िया मनके वर्चस्व खतम हो जही। कुल आबादी म देखे जाए तव अब भी तीन प्रतिशत वाले मनके राज हावय, काबर के ओमन संगठित हावय। अभी बने मौका हवय छिर्रा पार्टी कना। सुनता ले गठबंधन करके लोगन ल संगठित करके असानी ले मिशन 2018 तक पहुंचे सकत हाव।
                                                                                                            * जयंत साहू*
jayantsahu9@gmail.com
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14 May 2016

चौपाल म एक दिन के दफ्तर

छत्तीसगढ़ सरकार के प्रदेशव्यापी लोक सुराज अभियान पुरा प्रदेश म एक साथ चलत हावय। गांव के गुड़ी म सबो विभाग के लोगन मन जुरियाके, अपन समस्या अउ शिकायत के आवेदन अफसर मनला सऊपथे। सबो के संघरे जुराव होवय के सेती आम जनता के आवाज बुलंद रिथे। शासन-प्रशासन उंकर बात ल सुनथे तको। एके दिन के सुराज के सेती जनता म निराशा के संगे-संग खुशी तको हावय के कम से कम एक दिन तो अफसर मन गांव म आथे जेन मनला खोजत दफ्तर के चक्कर काटत रहिथन। 
लोक सुराज ले एक बात तो बने होवथाबे के अफसरगिरी म लगाम लगत हावय, भले एक दिन सही। सरकार के सभो विभाग के मंत्री के संगे-संग स्वयं मुख्यमंत्री तको लोक सुराज के निगरानी करत हावय तेन पाके कोनो अफसर के रौब नइ चलत हावय। नइते अक्सर देखब म आथे के जब ओकर दफ्तर जाबे तव एक दिन के काम खातिर तको दस दिन पदोथे। अधिकारी मिलथे तव बाबू छुट्टी म अउ बाबू मिलथे तव अधिकारी दौरा म चल देथे। आदमी के नाव-गांव देख के तको काम ल लटका देथे। गांव के किसान मनके पटवारी अउ तहसील कार्यालय मन म अइसे निरादर होथे के मानो छत्तीसगढ़िया मजदूर किसान दू कउड़ी के आदमी होगे। सबले जादा आवा जाही किसान मन के पटवारी अउ तहसील कार्यालय म होथे, एक दिन के काम म किसान मन महीना भर ले चक्कर काटथे उंहचे दलाल मन के काम एक घंटा म हो जथे। 
गांव म लोक सुराज के आयोजन होवथाबे तव कतकोन किसान के समस्या के निराकरण तुरते होवथाबे। योजना के हितग्राही मनला तुरते होकर लाभ दे जावथाबे। हरेक गांव ले अइसे आरो मिलत हावय के किसान ला मुआवजा के रकम मिलगे, आधुनिक खेती के जानकारी संगे संग कृषि औजार मिलगे। अइसने सरकार के तमाम योजना मनके बारे म लोक सुराज अभियान शिविर म जानकारी दे जावथे। लोगन मन खातिर सरकार के गजब अकन लाभकारी योजना हावय फेर जानकारी के आभाव म आम जनता ओकर लाभ नइ ले पावय। कतको विभाग के कर्मचारी मन अलाली के सेती बने जानकारी तको नइ देवय दफ्तर म। लेकिन लोक सुराज शिविर म बड़े-बड़े अफसर मनके जुराव होवथाबे तेन पाके सबो कर्मचारी मन चेत करके काम करत हावय। एक दिन के चौपाल म अतेक काम निपट जावथे जतका छै महीना म नइ होवय। आवेदन के आंकड़ा ल देखे जाय तव एक तिहाई ले आगर आवेदन के तुरते निपटारा होवथाबे। 
सोचे के विषय आए के छै महीना के काम एक दिन म होवथे। येकर दूसर पक्ष ल देखे जाए तव यहू सोचे जा सकत हावय के अधिकारी अउ कर्मचारी मन जबरन एक दिन के काम ल छै महीना ले लटका के राखय। अगर प्रशासन सही तरीका ले काम करतिस तव दफ्तर म काम के बोझा नइ परे रितिस। अगर विभाग काम के समय अउ कर्मचारी के कमी के हवाला देथे तव ओमन लोक सुराज के अपने काम के आकड़ा देखय। जब लोक सुराज म एक दिन म काम के निपटारा हो सकत हावय तब आन दिन काबर नइ हो सकय? लोक सुराज म सैकड़ों हितग्राही मनला सम्मान के साथ सौगात मिलथे तव आन दिन उही योजना के लाभ खातिर महीना भर चक्कर काटे ल काबर परथे। जबकि उही विभाग उही अफसर मन अड़हा दिन तको काम करत रिथे। कुल मिलाके केहे जाए तब गांव के चौपाल म हर दिन सुराज शिविर के जरूरत हावय।    
* जयंत साहू*
jayant sahu
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10 Mar 2016

2022 तक हर आदमी उद्यमी !

प्रधानमंत्री जी के छत्तीसगढ़ दौरा ह उम्मीद ले कम खुशी देने वाला रिहिसे। ऊंकर ले जेन बात के आस लगाय रेहेन वो पूरा जरूर होइसे फेर छत्तीसगढ़ के परिदृश्य म कुछ हद तक कोरा घलोक लागिस। जइसे के सबो जानथे के ओमन अपन हर भाषण म ये बात ल किथे-'युवा मन अइसन काम करव, जेमा कोनो मजदूर झिन राहय सबो मालिक बनव। हमर सरकार के कौशल विकास ले हुनरमंद होके नौकरी करने वाला नहीं नौकरी देने वाला बनव।Ó बात तो वाजिब हावय, कब तक पर के नौकरी करहू। फेर छत्तीसगढ़ के मामला म कुछ हद तक ये बने बात नोहय काबर के इहां तो सबोच किसान हाबे। आन राज सहिक कोनो कोइला कारखाना, कोनो फटाका कारखाना, कोनो लोहा कारखाना उक म मजदूरी तो करबे नइ करय कुछेक जिला, अउ नौकरीहा परवार ल छोड़ के। 
तइहा समय ल सुरता करे जाए तब इहां मजदूर अउ मालिक के बीच शोषण वाला कोनो मामला नइ आवत रिहिसे। गांव के बड़का किसान घर छोटे किसान मन बनि करय। मंझोलन किसान मन सापर म काम ल उरकावय। सबो के काम एके बरोबर। तब कहां के मजदूर अउ मालिक के शोषण। हां कमजोर किसान अउ रोठ किसान के बीच फरक जरूर रिहिसे। फेर ऊंकरो बीच म कारखाना के मालिक अउ नौकर कस बेवहार नइ होवत रिहिसे। खेत म काम के बखत दाऊ अउ साऊंधिया। आन बखत म एके खटिया म चोंगी-माखुर गठय। अऊ संग म जेकर घर खेत नइ रिहिसे तिहू मन आन घर बनि कमाके अपन गुजारा कर लेवय। मजदूर अउ मालिक के खेल तो तब शुरू होइसे जब परदेशिया मन छत्तीसगढ़ आके रोजगार जमाइस अउ इहां के खेती करइया किसान मनके जमीन ल बिसाके कारखाना लगाईस। उंकरे खेत ल बिसाके उहीच मनला बनिहार बना दिस। अब हालत अइसे होगे हावय के अपने खेत म खेत मालिक बनि करत हावय। सरकार के कौशल विकास के सपना म छत्तीसगढ़ के युवा मन अपन-अपन खेती-खार ल बेंच के उद्यम लगाके व्यापारी मन जही तव कोन छत्तीसगढ़ राज ल धान के कटोरा कइही।
अइसने आकब होथे केंद्र के चश्मा म छत्तीसगढ़ के नक्शा कुछ आन दिखत हावय। अऊ उही चश्मा ल राज सरकार ह पहिने के कोशिश करत हावय। मोदी जी के उद्बोधन म घेरीबेरी 2022 के गोठ निकलथे। किथे के देश म सबले जादा युवा मनके आबादी हावय। सब युवा मन कौशल विकास ले उद्यमी बनव। रोजगार मांगव झिन रोजगार पैदा करव। सिरतोन म जेन हिसाब ले अबही के युवा मन पढ़ई करे के बाद नौकरी के तलाश म दर-दर भटकथे उकर बर तो बनेच हे ये योजना। फेर देश के सबले जादा चाऊर, दार अउ गहंू उत्पादक राज के युवा मन उद्यमी हो जही तब का स्थिति होही अन्नपूर्णा छत्तीसगढ़ के? जिहां खेती किसानी म लोगन रमे हे उहां कारखाना अउ उद्योग के बात होवत हावय। मेक इन इंडिया, मेक इन छत्तीसगढ़ के जलसा होवत हावय। अऊ जिहा खेती के लायक भुइंया नइये उहां जैविक खेती के बात होथे। कभू-कभू तो अइसे लागथे के इहां के स्क्रिप्ट उहां अउ उहां स्क्रिप्ट इहां पढ़ागे। दार-चाऊर अउ तेल गहूं भर ले अब जिनगी के गुजारा नइ चलय। देश के अर्थव्यवस्था ल चलाये बर उद्योग घातेच जरूरी हावय, फेर छत्तीसगढ़ के उपजाऊ माटी म तो कारखाना नइ खड़ा होना चाही। परंपरागत व्यवसाय म ही नवा रोजगार के अवसर खोजे जाना चाही तब शायद हम 2022 तक पहुंच पाबो। * जयंत साहू*
JAYANT SAHU
DUNDA, RAIPUR CG
9826753304,

5 Mar 2016

कमाथन तेकर ले आगर तो गवांथन

देश म महंगाई ह दिनो-दिन सुरसा सही मुंह फारत हावय, आदमी के आमदनी तको उही मुताबिक बाढ़त हावय। जेन सामान चार आना म आवत रिहिसे वो अब चार कोरी म आथे। बिसइया तको तो पांच रूपिया रोजी नही तीन सौ पावत हावय। काम मिलत हावय अउ बरोबर रोजी पावत हावय तेकर बर तो अब के समे म तको परवार चलाना साहज हावय फेर जेकर कना काम नइये, मन माफिक मजूरी नइ मिलत हावय ऊंकर हालत ठीक नइये। लेदे के अपन गुजारा करत हावय। छत्तीसगढ़ म तो स्थानीय मजदूर के हालत अउ जादा खराब हाबे। आदमी के मुताबिक काम नइये, काम मिलथे भी तव मजदूरी कम देथे। मनरेंगा अऊ आन विकास के काम सिरिफ गांव कोति चलत हावय तव शहर के गरीब का करय? शहर मन म तको गरीबहा लोगन मन बसे हावय। इहां काम के कमी नइये फेर स्थानीय मजदूर ल मिलय तभे तो। इहां तो बाहिर के मजदूर मन आके कम दाम म काम करे बर तियार हो जथे। हाथ अउ गोड़ धरके आए रिथे, परवार कहू अउ कमावत-खावत हावय। ओमन अपन पेट पोस बर स्थानीय मजूदर मनके पेट मार देथे। उपर ले सरकार के संपत्ति कर के बढ़ोतरी, दूबर बर दू असाढ़ होगे। सरकार ह पहिली तो बढ़ाय के गुनान करिस। अऊ जब प्रदेश भर म विरोध होइस तव कलेक्टर दर म उतरगे। येकर बड़े मन ले जादा छोटे अउ मंझोलन परिवार के बोझा बाढ़ही काबर के बड़े मन तो आगर ले आगर रूपिया धरे रिथे। फेर कमजोरहा मन कना तो सिरिफ खरचा के पुरति करारी रूपिया रिथे। अहू रूपिया हा सिरिफ घर खरचा खातिर रइथे। चाऊर-दार, दवई-दारू, तिहरहा खरचा, बर-बिहाव सही सब म मारे मजदूर मनखे मन घर म जादा रकम सकेल के रखे नइ सकय। हमर छत्तीसगढ़ ल भले हम परब संस्कृति के गढ़ कहिके छाती तानथन फेर खरचा के हिसाब ले देखे जाए तब इही सब तीज तिहार के मारे रूपिया के बचत नइ हो सकय। जतके के ततके होथे कतको कमा ले। महीना भर कुद-कुद के कमाबे ताहन महीना म कोनो तिहार परगे, सिरागे रूपिया। तिहार ल नइ मनाबो तेनो नइ बनय, अऊ थोक बहुत म तिहार होवय तको नहीं। जरत ले महंगाई उपर म कोरी खैरखा परवार। नान-नान काम म बेड़ा भर के पूछ परख कर खवा-पिया। नइ खवाबे तव आनी बानी के गारी खाबे। गरीब हाबन तभो ले आत्मसम्मान, स्वाभिमान सब जाग जथे। भले करजा होही ते होही फेर सुकालू ले कम खरचा नइ करय दूकालू। रूपिया नइये कहू ले करजा कर फेर सुकालू कस तहू होरी, देवारी नइ मनाबे तव समाज का कही! समाज तको अब आदमी ल उबारत नइये बोरत हावय। पारिवारिक अउ सामाजिक बने के चक्कर म हम आर्थिक रूप ले कतका कंगाल होवथाबन येला समाज के लोगन मन देखते होही। अबही बर-बिहाव के आरो मिलत हावय, दनादन बजार के खरीदारी चलत हावय। सोनार, हलवई, कोष्टा लाइन म आनी-बानी जिनिस के देखनी हावय। नेंग के जोरन के मइके के ससुरार के लराझरा काकी-कका, ममा-मामी अतका सकला जथे के लेवत-देवत ले हक खा जबे। घर म कही नइये तभो ले काखरो ले कम नइयन। बढ़हर मनके देखा-सीखी आए, के खरचा करे के खातिर कमाथे मजदूर मन, उही जानय। सरी जमा पूंजी गवांथे जाथे तबसुरता आथे के कमायेन तेकर ले आगर तो गवाये हन।
 * जयंत साहू*
jayantsahu9@gmail.com
9826753304
cont-: dunda ward 52 Raipur Chhatttisgarh

8 Feb 2016

भोलापन म लुटगेन हम

देश भर म चिटफंड कंपनी के खिलाफ पुलिस प्रशासन ह ताबड़तोड़ कार्रवाई करत हावय। इकर धरपकड़ ले तो अइसने जनाथे मानो घटना होय के पहिलीच पहुंचगे। जबकि चिटफंड के जाल ह इंकरे सह म अतेक फैले हावय। लोगन के लुटे के बाद होवइया कार्रवाई ह सांप रेंगे के बाद लउठी पटके वाला ताए। कंपनी के खुलते लगाम लगाये जातिस तव शायद आज लोगन के जमा पूंजी नइ डूबतिस। नाम भले अब चिटफंड कंपनी होगे फेर येमन अपन काम ल लुका चोरी ले नइ करे हावय। बकायदा बड़े-बड़े शहर म इकर कार्यालय खुले हावय। कंपनी के लाखों कार्यकर्ता हावय। अब सात साल बाद अचानक पुलिस ह उकर कार्यालय म पहुंचके कर्मचारी अउ एजेंट ल गिरफ्तार करके ये खुलासा करथे के हमन चिटफंड के भांडाफोड़ करेन तव ये बात सहराये के लइक नोहय काबर के देखब म आए हे के हरेक चिटफंड के दफ्तर के तिर तखार म थाना हावय, ओतका दिन ले उकर आंखी काबर नइ उघरिस।
बात म गौर करे जाय तव कंपनी रजिस्टार जेन ह अइसन कंपनी ल पंजीकृत करय, का उकरो जांच नइ होना चाही? जेन क्षेत्र म इकर कार्यालय चलय ओ कोति के नगरपालिका, जोन अफसर, पुलिस चौकी प्रभारी, संचालित भवन के मालिक मनला का येकर जानकारी सात साल बाद होइसे? जबकि चिटफंड के दफ्तर म रोज हजारों कार्यकर्ता अउ निवेशक मनके हुजुम लगे राहय। का ओ कोति पुलिस पेट्रोलिंग नइ होइस होही, अब जब सब कुछ समेट के कंपनी चलते बनिस तब कहत हावय के इहां चिट होइसे। जनता के रूपिया डूबे हावय अउ येमा दोसी सबो हावय।  कंपनी मालिक, अंशधारी मालिक संग कर्मचारी अउ एजेंट मनला अपराधी बनाये जावथे। माननीय न्यायालय ल ये मामला ल संज्ञान म लेके कुछ सलाह देना चाही। काबर के जेन मन एजेंट के रूप म काम करत हावय वहू मन धोखाधड़ी के शिकार होय हावय।
जतेक भी चिटफंड कंपनी के एजेंट पकड़ावत हावय सबो गांव के गरीब परिवार के लइका निकलत हावय। सबो के कहना हावय के ओमन कंपनी के प्लान ल देखके काम करे हावय। जइसन कंपनी के चाल-चलन रिहिस हमन ला गमे नइ रिहिस के येहा चिटफंड के काम करत हावय। कंपनी मालिक संग खादी अउ खाकी दूनों के उठना बइठना रिहिस। अब अचानक अतेक अकन कंपनी कइसे एक साथ कारोबार ल समेट दिस यहू म संका हावय।
बेरोजगारी अउ गरीबी ले हार के लोगन मन काम करे खातिर आए रिहिस। एजेंट मन किथे के हमन कहू जान पातेन के ये कंपनी फर्जी आए अउ रूपिया लूट के भागही तव अइसन काम कभू नइ करतेन। हम तो खुद गुमराह म रेहेन। उकर बात म गौर करे जाय तव ओमन ल अपराधी मानना कुछ हद तक सही नइये। लेकिन हमर देश के कानून किथे एक रूपिया चोराय चाहे एक हजार चोरी तो चोरी आए। लोगन के डूबे रकम म एजेंट मन कमीशन पाये हाबे अइसन म सबके उपर धोखाधड़ी के केस बनथे। फेर धोखा तो कंपनी मालिक करे हावय। कानून के जानकार मन किथे के अपराध तब माने जाथे जब जानबूझ के कोनो ल नुकसान पहुंचाये खातिर काम करे जाए, न कि भलई करे खातिर। अब इहां कोनो एजेंट जानबूझ के अपने घर परिवार के लोगन मन ला थोरहे डूबोही। कंपनी के नियत ले अंजान एजेंट परिवार वाले के लाखों रूपिया ल इही सोच के जमा करवाइस के बने बियाज मिलही।   
 * जयंत साहू*
jayantsahu9@gmail.com
add- dunda-52ward; post- sejbahar raipur cg
492015