9 Jan 2017

छेरछेरा: अन्न दान उत्सव

छत्तीसगढ़ के रहइया मन अपन भाग ल संहरावत किथे जब-जब हम धरती म जनम धरन तब-तब इही भुंइया म आवन। इहा के कन-कन म संस्कार समाहित हवय। खेत के माटी ले लेके घर के कोठा कुरिया अउ गांव के सियार ले दइहान तक पछीना के कथा कंथली छाहित हवय। इहां सियान के बीते म परंपरा बिसरे के तको संसो नइये काबर के हरेक परब खेती अउ माटी ले जुरे हावय। जब तक दुनिया म खेती होही, काया माटी म लोटे रइही तब तक इहां के संस्कृति ल भुलाय नइ जा सकय। 
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अबही बखत हवय दानपून के तब थोकन छेरछेरा ल तको सोरिया लेथन। छेरछेरा ल अन्नदान के महापरब के रूप म पूस महीना के पुन्नी के दिन मनाये जाथे। ये दिन छत्तीसगढ़ के गांव-गांव म दानशीलता के अनोखा परंपरा देखे बर मिलथे। लइका-सियान सबोच ह घर-घर जाके धान मांगथे। घर वाले मन तको खुशी-खुशी मांगे बर अवइया मनके अगोरा करत चरिहा भर धान ल धरे मुहाटी म बइठे रिथे। घर के दुवारी म अइवइया सबोच हर ठोमहा-ठोमहा धान ल पाथे। दान देवइया अउ लेवइया दूनों के मन म बरोबर खुशी हमाय रिथे। का बड़हर अउ का गरीबहा सबोच मन अन्नदान के ये दिन ल छेरछेरा तिहार के रूप म मनाथे। बिहनिया-बिहनिया घर के मुहाटी म छेरछेरा मंगइया मन किथे- 
छेरिक छेरा, छेर मड़ई दिन छेरछेरा,
माई कोठी के धान ल हेर हेरा।
अरन-दरन कोदो दरन,
जभ्भे देबे तभ्भे टरन।
The annual examinations of class 9th and 11th will be conducted by CBSE from 9th March 2017
Dangal has emerged as the highest grossing Hindi film at the box office ever.Aamir Khan’s wrestling drama will also be the first Hindi film to cross Rs 350-crore mark. The film has already collected Rs 345.30 crore in its third week and is still going strong. 
अइसन रकम ले छेरछेरा मंगइया मन मुहाटी ले बिगर छोके नइ टरय। तइहा समे से चले आवत ये चलागन म ये बात अऊ जबर हावय के छेरछेरा ल कोनो भिक्षाटन ले जोर के नइ देखय। भलूक छेरछेरा ल दानपरब के कहे जाथे। अन्न दान करके गांववाले मन पुन्य कमाये। 
छेरछेरा के तिथि- पौष पुर्णमासी माने पूस महीना के अंजोरी पाख के आखरी दिन अन्नदान के महापरब छेरछेरा मनाये जाथे। हिन्दू पंचाग ह इही दिन ल शाकम्भरी जयंती तको किथे। अइसे कहे जाथे के ये दिन के दानधरम के विशेष महत्ता हावय। ग्रंथ के मुताबिक इही दिन भगवान शंकर नटावतार म माता अन्नुपूर्णा ले अन्नदान पाये रिहिसे। छत्तीसगढ़ म अइसे मानता हावय के अन्न के दान करे ले अन्नपूर्णा माता ह किसान मन ऊपर अपन किरपा बरसाथे। दान देवइया के कोठी कभू रिता नइ होवय। 
अन्नदान- छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान अंचल आए तेन पाके इहां के सबो परब खेती ले जूरे मिलथे। इहां असाढ़ के महीना म किसान मन धान के फसल उगाथे अउ कुवार-कातिक के आवत ले धान ह लुवा-मिंजा के कोठी म छबा जथे। पूस आवत ले खेती-किसानी के सरी बूता उरक जाये रिथे। परंपरा अनुसार छेरछेरा म किसान मन उही कोठी के धान ल दान करके पुनित कारज करथे। छेरछेरा म धान-कोदो जइसन अन्न के दान ही करथे। तभे तो उनला अन्नदाता कहिथे दुनिया। 
छेरछेरा परब के लोकमान्यता- छेरछेरा परब ल लेके कतकोन किस्सा तको किथे सियान मन। ओमन बताथे के एक समय म छत्तीसगढ़ म गजब सुघ्घर फसल होय रिहिसे। सबो बड़का किसान मन अपन-अपन खेत के फसल ल लू मिंज के कोठी म छाब दिस। दूसर कोति गरीब बनिहार मन पोट-पोट भूख मरे बर धर लिस तब अन्न माता रिसागे। माता किथे मैं सबोके सपूरन अन्न दे हाबव तभो ले कइसे आधा मानूख भूखन-लांघन हावय। रिस म माता ह धरती म अकाल पार दिस। अकाल ले सबो के कोठी-डोली अटागे। तब सबो जुरमिलके अन्न माता ले अरजी-बिनती करीन। माता ह परगट होके किथे-तुमन मोला अपन कोठी म धांद के राखे झिन राहव बल्कि सबला अन्न के दान करत राहव। जग म कोनो लांघन झिन राहय अइसन उदीम करव। अन्नपूर्णा माता के कहे अनुसार सबो कोनो अन्न के दान करे कर तियार होगे। तब माता के किरपा ले सबो के फसल ह बने होइसे अउ पूस के पुन्नी के दिन माता ह परगट होय रिहिसे तेन पाके उही दिन ल ही दान परब के रूप म मनाये के चलागन शुरू करे गिस। गांव के लइका मन अलग सियान मन अलग-अलग टोली बनाके घरो-घर किंजरथे। दान करइया मन घर के दुवारी मन धान के टोपली धरे ठाढ़े रिथे। ये दिन बीजा-बीजा अउ माली-कटोरी मन नहीं बल्कि म मुठा, पसर अउ काठ-पइली धान के दान करे जाथे। 
छिर्रा छेरछेरा मंगइया- गांव के नान्हे लइका मन अपन-अपन बर छेरछेरा मांगे बर जाथे। ये दिन के पाये धान ल लइका मन अपन पोगरी धरथे। अइसने घर म सउंधिया अउ गांव म लगे कोतवाल, नाऊ, धोबी, राउत, मेहर मन तको गांव म आन लोगन मन संग संघरे छेरछेरा मांगथे। मालिक ठाकुर मन अपन-अपन बनिहार मनला मनमाफिक दान करथे।  
टोली म छेरछेरा मंगइया- गांव-गांव म भजन-किर्तन, सेवा मंडली, रामायण, रामधुनी, अखाड़ा, लीला मंडली वाले मन चरियारी काम बर छेरछेरा मांगे खातिर गाना-बजाना करत निकलथे। जगह-जगह म गीत-गोविंद तको सुने म मिलथे। रामधुनी अउ डंडा नाच ले गांव भक्तिरस म सराबोर हो जथे। 
समाजी रूपिया के हिसाब-किताब-  गांव के समाजी वाला मन छेरछेरा के सकलाये धान ल बेंचके बाजा-रूंजी बिसाथे। उपराहा रकम ल सकेल के राखे रिथे। जेन कोनो ल मउका म रूपिया के जरूरत परथे तव इही समाजी पइसा ल बियाज म उठाथे। साल के साल छेरछेरा के दिन समाजी पइसा के हिसाब-किताब तको होथे। जेन मन समाजी पइसा ल उठाये रिथे तेन मन फेर समाज म जमा करथे। अइसे रकम ले धीरे-धीरे समाजी पइसा के बढ़ोत्तरी तको होवत रिथे। छेरछेरा परब ह धान के महत्ता तो बगराबेच करथे संगे-संग एक दूसर ल मउका म रूपिया-पइसा, धान-चाउर के साहमत करे के सीख तको देथे।
Russia: Canada: United States: China: Brazil: Australia: India:

Iran: Mongolia: Peru: Chad: Algeria:
अन्नदान के परब छेरछेरा ह आन राज म तको छत्तीसगढ़ी संस्कृति अउ पंरपरा के शान बनथे। जेन दुनिया के कोनो कोना म नइ होवय वो छत्तीसगढ़ के गांव म देख बर मिलथे। आन बर सीख के गोठ आए के छत्तीसगढ़ म दानपून के तको विशेष परब आथे। येमा जेन मन धरम करम ले जुड़े हावय तेने मन अऊ जेन मन धरम-करम ले कोसो दुरिहा रहिथे तेने मन पूस के पुन्नी म धान के दान करके पून कमाथे। वइये ये दिन के पुराण म एक अउ उल्लेख मिलथे के इही दिन ले पुण्य स्नान के शुरूआत होते जोन मांघी पुन्नी तक चलथे। ये स्न्नान के हिन्दु धर्म  विशेष महत्व बताये गे हावय। अइसे मनता हवय के ये दिन के स्न्नान, धियान अउ दान मोक्षदायनी होथे। माने छेरछेरा के दिन स्न्नान-धियान-दान आदि करम करे ले जीव घेरी-बेरी जनम-मरण के बंधना ले छूटथे, मोक्ष मिलथे। 
Argentina: Kazakhstan:  Congo, Democratic Republic of the:

Mexico: Saudi Arabia: Indonesia: Sudan: Libya: 
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यह लेख छत्तीसगढ़ की जनभाषा छत्तीसगढ़ी में है। जिसमें छेरछेरा पर्व के विषय में प्रचलित पंरपरा को लिपिबद्ध किया गया है। कुछ छायाचित्र गुगल से—

5 Dec 2016

आरबीआई देव! हमु ला 'जियो'


नोटबंदी के बाद ले चारो मुड़ा इहिच गोठ सबोच के मॅुह म। अब का होही भाई समारू, कइसे करबोन ग बुधारू? जेन कभु टीबी, रेडियो अउ पेपर ले दुरिहा हावय तेने मन रई-रई के आरो लेवत रिथे। अऊ कोनो नवा खबर आगे का रे तिहारू? दसरू हर समारू, बुधारू अउ तिहारू सहिक छोटे पोटा के नइये। छाती फूलोवत किथे- जेन गड़ौना मन गड़िया-गड़िया के राखे हावय तेन मन फिकर करय। मुरहा-पोट्टा कना पइसच नइये तव फिकर काके! धरे हाबन तेन हमर कमई के पइसा आए। आयकर ल सबूत जाही तव गरीब मजदूर मनके ओनहा ल संझाकुन निचो के देख लेही। चेंदरा ले अतका पछिना चुचवाही के धनाहरी-पेटकाप्टी मन बूड़ मरही। मोदी के एक बात अऊ बड़ निक लागिस। ओमन अपन सबो मंत्री मनके खाता के जानकारी मांगे हावय। मंत्री का कका, सबो सरकारी अफसर-कर्मचारी मनके खाता के जांच होवय। गरीब के हक मार-मार के अपन म भोभस भरे हावय।
होये के रिहिस तने होगे। आगू अवइया दिन म का होही येकर गुनान करे जाय तव अब सबके हाथ म एकक मोबाइल होना घातेच जरूरी होही। वहू म इंटरनेट डाटा राहय। सरी कामकाज नेट बैंकिंग ले होही। थइला अउ घर नगद रूपिया रखना नइये। हमर बैंक खाता म पइसा माढ़ेच-माढ़े लेन-देन चलत रइही। ताजा खबर के मुताबिक अब मोबाइल, बैंक एप, पेटीएम, एसएमएस, के झंझट तको करे बर नइ लागय। चेक, डीडी, एटीएम, क्रेडिट, डेबिड कार्ड कुछूच नइ लागय। अब तो आधार नंबर ले लेन-देन के उदीम करे के जोंगत हावय सरकार। माने बइठे-बइठे देखव तमासा, आगे-आगे होता है क्या-क्या।


बड़हर मन तो सबला आसानी ले कर लेही, बीच वाले मन तको धीरे-धीरे लाइन म आ जही। लेकिन फदक जही अनपढ़ गरीबहा मन। नतो मोबाइल जाने, न इंटरनेट। कइसे कैशलेस होही? मोबाइल अउ नेट डाटा कोन देही? सबले मुस्कुल तो डोकरी दाई अउ बबा के होही। आज समाज म भरोसा के आदमी घलोक तो नइये। जेने ल नंबर देबे तेने दूनंबरी कर देही तव। अम्मट ले निकल के चूररूक म परउल हो जही। नोटबंदी के फैसला के बाद ले आरबीआई ह कोनो कोती बाढ़ तव कोनो कोती सुक्खा के हालात बना दे हावय। उपराहा म आयकर ह लिमिट-लिमिट करत हावय तभो ले बैंक अउ एटीएम नो कैश के बोर्ड चिपकाये बइठे हाबे। बैंक के बाबू मन आगू एसी म माछी मारत राहय तेन मन उवत के बुढ़त कमावत खाताधारी मनला कोसत रइथे। करे कोनो अऊ, भरे कोनो अऊ।  10 प्रतिशत गद्दार के भगुतना ल 90 प्रतिशत वफादार मन भुगतत हावय। तभो ले गम नइये। कम से कम दूनंबरी करइया मनतो चेतही। चलव इही ओढ़र म डिजिटल हो जबो हम सब। अबही के बखत ल देखत रिलाइंस के जियो वाले मनके तको गुनगान करे बर परही काबर के अभी ऊंकरे डाबा भरे हावय। दुनिया ल काहत हावय जियो डिजिटल इंडिया, न गोठबात के पइसा न इंटरनेट के। फोकट म अनलिमिटेड 4 जी डेटा रिलाइंस वाले मन अपन जियो सिम म देवत हावय। आगू 31 दिसंबर के बंद ले होवइया रिहिसे फेर अब मार्च तक बाढ़गे। ठट्ठा करे के बेरा नइये नइते आरबीआई अउ आयकर देवता मन सो बिनती करत पहिली इही मांगतेन के अब 4 जी मोबाइल अउ जियो सिम कार्ड दे देवा...।




नोटबंदी विशेष लेख का अन्य लिंक- 

20 Nov 2016

बिसरगे सुरता अदला-बदली ले निस्तार के

बिसरगे सुरता अदला-बदली ले निस्तार के : वस्तु विनिमय (barter)

तीस बछर पहिली हमर गांव म एक झिन नून बेचइया डोकरा आवय। बइलागाड़ी म एक गाड़ी नून धरके। ओकर डोकरी ह गाड़ी खेदत राहय अउ डोकरा हा गली म ऑक पारय- 'नून लेलव नून... एक काठा धान के दू काठा नून हो...।' ओकर आरो पाके गांव के सियानिन दाई मन टोकनी-टोकनी धान ल धरके घर ले निकलय अउ नून के बदला म धान ल देवय। नूनवाला डोकरा ह हमर गांव म महीना-पंदराही आवय। हमरे तिर-तखार के गांव मन ओकर गवई रिहिसे। नून बेचई म डोकरा के पूरा परिवार लगे राहय। कभू-कभू हाट-बजार म तको ओकर आरो मिलय-'नून लेलव नून... एक काठा धान के दू काठा नून हो...।'
अबही असन तइहा के सियान मन नोट के गठरी धरे बजार नइ जावत रिहिसे। अऊ आन-तान खरचा तको तो नइ रिहिस हावय। कुछू भी जिनिस लेना राहय तव सबेच ह धान-पान के बदली म मिल जाए। सियान बबा के थइला म पइसा देखेच नइ रेहेन। तभो ले नानपन म घर म सबोच सुख ल देखे हावन। चांउर-दार, तेल-हरदी, धनिया-मिर्चा, हरियर साग के दिन म हरियर-हरियर भाजी, अड़हा दिन बर खुला-सुक्सा। अमली, आम, आलू, भाठा, रमकेलिया, पताल के खुला, सुक्सा म चिवरा, चना, चनौरी मिलय। अब रइगे बात नून अउ गुर के तव नून ल जइसे नूनवाला डोकरा कना बिसावय धान के बदला म ओइसने छिंदी (सिंधी) दुकान म गुर तको धान के बदली म मिलय। तेल म भुंजे-बघारे वाला साग कमेच चुरय हालाकि हमर घर घानी तको रिहिसे, हाना तको किथे न 'तेली घर तेल रही त माहल ल नइ पोतय' तइसे बरोबर। बियारा म एक ठिन घानी गड़ेच राहय। बबा ह अपन पाहरो म अपनेच घानी के तेल खावय। घानी म तिली, सरसो, अरसी, करन, लीम अउ अंडी के तेल पेरय। घर के घानी ले तेल के तेल अउ ओकर खरी तको काम के राहय। फेर हमर दिन के आवत ले बबा ह घानी चलय बर छोड़ दे रिहिसे, हां बियारा म घानी ल गड़े देखे हाबन। रायपुर के नॉका म बड़का-बड़का घानी के पेराय तेल ल खावत रेहेन। घर के कोठा म राउत के दुहना नइ अतरत रिहिसे। एक्का-दुक्का के छेवारी उचेंच राहय। घरे म मही-दही अउ घीव मिलय। बस अइसने जइसे-तइसे दिन कटते-कटत आज सबोच ल पइसा म बिसाये के दिन आगे। 
बाहिर ले एक झन छिंदी ह गांव म आके दुकान खोलिस। हमरेच गांव के लोगन मन कना सामान बिसावये अउ हमरे कना बेंचय। फेर ओकर बेचे के तरीका आन रिहिसे। एकेच ठउर म सबोच जिनिस ल बिसावय अउ बेचय। ओहा न तो गांव के किसान रिहिसे अउ न ही बनिहार। गांव म घर न खार म खेत तइसे बरोबर लोटा-धारी धरे अइस अउ पटइल घर के ओसाही म दुकान जमाइस। जेन गांव म लोगन मन सामान के अदला-बदली करके निस्तारी करय उहां ओ छिंदी ह पइसा के लेन-देन शुरू करिस। धान के अलावा साग-भाजी अउ दलहन-तिलहन ल तको अपने ह पइसा म लेवय अउ गांव के लोगन मन कना बेचय। देखते-देखत सबो जिनिस अमोलहा के होगे।
जेन आदमी मन मउका परे म अपन घर के सामान ल बेंचय तेन मन फोकटे-फोकट बेच के पइसा सकेले के शुरू कर दिस। घर म होय उपज ल छिंदी के दुकान मन बेचय अउ बदला म पइसा ल सकेल के राखे राहय। वहू छिंदी हरेक चीज ल बिसावय। बड़का किसान मन धान, गहूं, तिवरा, चना, अरसी। छोटे किसान मन राहेर, मसूर, सरसो, उरीद अउ बारी के साग-सब्जी। जेकर घर किसानी लइक खेती नइ राहय तेनो मन खार ले आमा, अमली, तेंदू, चार के फर के संगे-संग करन, लीम, मउहा, अंडी अउ जलाऊ लकड़ी तको सकेलय। 
बनिहार अउ किसान मन एक दूसर के घर ले सामान अदला-बदली करके निस्तारी चलावय, फेर जब ले छिंदी के दुकान खुलिस हर सामान उहां पहिली पहुंचथे तेकर पाछू आन मन पाथे। बेचे-बिसाय के खेल म धीरे-धीरे गांव वाले मन ठंठन गोपाल अउ छिंदी होगे मालामाल। उपज के पाछू कतका मेहनत करे बर परथे येला कमइया के छोड़े अऊ कोन जान पाही। फेर ये मेहनत करइया के दुर्भाग्य आए के मोल ल दुकान अउ बाजार म बइठे बैपारी मन तय करथे। आगू जेन नूनवाला डोकरा ह एक काठा धान के दू काठा नून देवय ओही अब दू पइली देवत हाबे, माने धान के मोल आधा होगे। अइसने छिंदी तको वन उपज अउ फसल ल अठन्नी देके बिसाथे अउ रूपिया म बेचथे। कहू बीच म ये छिंदी नइ आए रितिस तव आजो हमन अपन खेत म उपजे फसल ल धरके जातेन अउ जरूरत के सामान लेके आतेन। आदला-बदली ले दिन बने बिततिस, रूपिया-पइसा बर हाय-हाय नइ करत रइतेन।  
जयंत साहू,
ग्राम-डूण्डा-वार्ड-52, रायपुर छ.ग.
jayantsahu9@gmail.com
9826753304