24 Jul 2014

छत्तीसगढ़ के विधानसभा म नइ गुंजय छत्तीसगढ़ी!

 
छत्तीसगढ़ राज ल अलग होय तेरह बछर बितगे, छत्तीसगढ़ी ल राजभासा के पदवी पाय छै बछर ले आगर होगे हाबे फेर अब ले छत्तीसगढ़ी ह सरकारी कामकाज के भाखा नइ बने हाबे। डा. रमन सिंह के सियानी म तिसरइया पइत इहां भाजपा के सरकार बइठिस। साढ़े चार कोरी विधायक चुनके अइस जेमा एक्का-दुक्का ल छोड़के सबोच हर छत्तीसगढ़ी भाखा ल जानथे। छत्तीसगढ़ी म गोठियाथे-बतराथे फेर जब-जब अइसन मउका आथे जिहां ओमन ल महतारी भाखा म गोठिया केओकर मान बढ़ाना चाही ओ बखत ओंकर मुंह ले आन भाखा निकलथे। तव का छत्तीसगढ़ी ल सिरिफ लोगन ल बुद्धू बनाय बर ओमन बोलथे? अइसन बेवहार छत्तीसगढ़ी संग काबर होइस जबकि सबो विधायक-मंत्री मनके चुनई के भासन ह छत्तीसगढ़ी म होवत रिहिसे। बड़ मीठ-मीठ बोलय, दाई-ददा, भाई-बहिनी, कका-काकी, ममा-ममा सबो नता ल उटकय अऊ जानता ल अपन गुरतुर बोली म हिरोवए। अब चुनई जीतागे तव लागथे ओहू मन ल अब छत्तीसगढ़ी म गोठियाए म लाज लागत होही। ये बात ह परमानित घलो होगे विधानसभा अउ लोकसभा के सपथ लेवई कार्यक्रम म।
का फइदा अइसन छत्तीसगढ़ी बोलइया-समझइया विधायक होय ले विधान सभा म तो सवाल-जवाब छत्तीसगढ़ी म होबे नइ करें। आन दरी ले ये पइत जादाच आसरा रिहिस नवा विधायक मन ले, सुरू म इही लागत रिहिसे के विधानसभा के सदस्या लेवत बखत छत्तीसगढ़ी भाखा ले विधानसभा गुंज जही फेर छत्तीसगढ़िया मन के ये सपना ह सपनाच रइगे। छत्तीसगढ़ी म सपथ लेवइ ह दसे-बारा म अटकगे छत्तीसगढ़ी के आकड़ा छत्तीस तक तको नइ पहुंचिस। अइसने लोकसभा म चुनके गे गियारा सांसद मन ले तको रिहिसे फेर उहां आठवां अनुसूची के सेती अबिरथा होगे। बोलइया मन तो इहू काहत हे के आठवां अनुसूची ओखी भर होइसे, छत्तीसगढ़ी के छोड़े अऊ आन भाखा नइ आतिस तव कइसे करतिस? सोचे अउ समझे के बात आए जेन ल पीरा रिथे वो बोंबिया डारथे, नइये तिकर तो गोठे छोड़व।
तातेतात अबही छत्तीसगढ़ विधान सभा सत्र आयोजित होय रिहिसे। जेमा छत्तीसगढ़ी म सवाल-जवाब के दुकाल परे रिहिस हाबे। जानबा होवय के इही विधान सभा ह छत्तीसगढ़ी शब्दकोस छपवा के गजब वाहवाही बटोरे हाबे। एक नही, दूदी ठिन किताब छपा ठरिस राजभासा आयोग के मारफत ले। ओ शब्दकोस के विधान सभा ह का उपयोग करत हाबे तेला उही जाने। अपने मन हिरक के नइ देखत होही तइसे लागथे। बने मनसा लेके बनाय रितिस शब्दकोस तब आज ले छत्तीसगढ़ी ह कामकाज के भाखा बन जतिस।
दूसर मन ला माने बाहिर ले आए बड़का अफसर मन ल येमा काम करे म भले अड़चन आही। फेर अड़चन ल दूरिहाय बर विधान सभा तो खुदे शब्दकोस बनाये हाबे तव ओकर उपयोग करंय न। अइसे घलोक नइहे के सबो बाहिर के अफसर हाबे, छत्तीसगढ़िया मन घलोक बड़े-बड़े पद म हावे, होहू मन छत्तीसगढ़ी म गोठियाथे-बतराथे। फेर काम करत बखत छत्तीसगढ़ी के उपयोग नइ करे एकर कारन हे के ओमन तीन बघवा छपे कागज के आदेश ल मानथे। अउ आदेश करइया मन विधान सभा म खुदे हिन्दी म सवाल-जवाब करथे तव दूसर मनके का असरा करबोन।
९८२६७-५३३०४

5 comments:

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  2. ये मीठ लबरा मन ल छत्तीसगढ़ी भासा ले कोई मतलब नइये...गा..! ये मन ल अपन-अपन कुरसीच के संसो रिहिस तेकरे सेती चुनाव के समे अपन बर वोंट सकेले बर बड़ मीठ-मीठ गोठियावय...मोर दाई-ददा हो, काकी-काकी हो, भाइ-बहिनी हो कहिके भासन देवय|

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  3. सिरतोन म संतोष जी येमन मीठ लबराच आए। उंकर घर म त्रिभासी संस्कृति चलथे, डोकरी-डोकरा छत्तीसगढ़ी, दाई-ददा हिन्दी अउ बेटी-बेटा मन अंग्रेजी। बीन पेंदी के लोटा......

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  4. मीठलबरा अऊ जाँगरचोर मन कांही नी कर सकर, जनता ल चुतिया बस बना सकथे। छत्तीसगढ़ी ल संविधान मा भाषा के दर्जा घलो नी मिले हे। राजभाषा आयोग के 5 साल के कार्यकाल बीत गे फ़ेर एको बेर एखर बर कदम नी उठाईस। संविधान में भाषा के दर्जा पाए बर राजस्थानी अऊ भोजपुरी घलो लैन मा हे, ओखर मन संग मिल के संयुक्त आन्दोलन चलाना चाही। ये सलाह मैं आयोग के अध्यक्छ जी ल दे रहेवं। फ़ेर करे त कोन करे?

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    1. हहो.. सबो झिन ल संघरे लड़ई लड़े ल परही,
      फेर ... आयोग ह तो सरकारी सुख भोगे के ठीहा होगे हाबे।

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