5 Dec 2016

आरबीआई देव! हमु ला 'जियो'


नोटबंदी के बाद ले चारो मुड़ा इहिच गोठ सबोच के मॅुह म। अब का होही भाई समारू, कइसे करबोन ग बुधारू? जेन कभु टीबी, रेडियो अउ पेपर ले दुरिहा हावय तेने मन रई-रई के आरो लेवत रिथे। अऊ कोनो नवा खबर आगे का रे तिहारू? दसरू हर समारू, बुधारू अउ तिहारू सहिक छोटे पोटा के नइये। छाती फूलोवत किथे- जेन गड़ौना मन गड़िया-गड़िया के राखे हावय तेन मन फिकर करय। मुरहा-पोट्टा कना पइसच नइये तव फिकर काके! धरे हाबन तेन हमर कमई के पइसा आए। आयकर ल सबूत जाही तव गरीब मजदूर मनके ओनहा ल संझाकुन निचो के देख लेही। चेंदरा ले अतका पछिना चुचवाही के धनाहरी-पेटकाप्टी मन बूड़ मरही। मोदी के एक बात अऊ बड़ निक लागिस। ओमन अपन सबो मंत्री मनके खाता के जानकारी मांगे हावय। मंत्री का कका, सबो सरकारी अफसर-कर्मचारी मनके खाता के जांच होवय। गरीब के हक मार-मार के अपन म भोभस भरे हावय।
होये के रिहिस तने होगे। आगू अवइया दिन म का होही येकर गुनान करे जाय तव अब सबके हाथ म एकक मोबाइल होना घातेच जरूरी होही। वहू म इंटरनेट डाटा राहय। सरी कामकाज नेट बैंकिंग ले होही। थइला अउ घर नगद रूपिया रखना नइये। हमर बैंक खाता म पइसा माढ़ेच-माढ़े लेन-देन चलत रइही। ताजा खबर के मुताबिक अब मोबाइल, बैंक एप, पेटीएम, एसएमएस, के झंझट तको करे बर नइ लागय। चेक, डीडी, एटीएम, क्रेडिट, डेबिड कार्ड कुछूच नइ लागय। अब तो आधार नंबर ले लेन-देन के उदीम करे के जोंगत हावय सरकार। माने बइठे-बइठे देखव तमासा, आगे-आगे होता है क्या-क्या।


बड़हर मन तो सबला आसानी ले कर लेही, बीच वाले मन तको धीरे-धीरे लाइन म आ जही। लेकिन फदक जही अनपढ़ गरीबहा मन। नतो मोबाइल जाने, न इंटरनेट। कइसे कैशलेस होही? मोबाइल अउ नेट डाटा कोन देही? सबले मुस्कुल तो डोकरी दाई अउ बबा के होही। आज समाज म भरोसा के आदमी घलोक तो नइये। जेने ल नंबर देबे तेने दूनंबरी कर देही तव। अम्मट ले निकल के चूररूक म परउल हो जही। नोटबंदी के फैसला के बाद ले आरबीआई ह कोनो कोती बाढ़ तव कोनो कोती सुक्खा के हालात बना दे हावय। उपराहा म आयकर ह लिमिट-लिमिट करत हावय तभो ले बैंक अउ एटीएम नो कैश के बोर्ड चिपकाये बइठे हाबे। बैंक के बाबू मन आगू एसी म माछी मारत राहय तेन मन उवत के बुढ़त कमावत खाताधारी मनला कोसत रइथे। करे कोनो अऊ, भरे कोनो अऊ।  10 प्रतिशत गद्दार के भगुतना ल 90 प्रतिशत वफादार मन भुगतत हावय। तभो ले गम नइये। कम से कम दूनंबरी करइया मनतो चेतही। चलव इही ओढ़र म डिजिटल हो जबो हम सब। अबही के बखत ल देखत रिलाइंस के जियो वाले मनके तको गुनगान करे बर परही काबर के अभी ऊंकरे डाबा भरे हावय। दुनिया ल काहत हावय जियो डिजिटल इंडिया, न गोठबात के पइसा न इंटरनेट के। फोकट म अनलिमिटेड 4 जी डेटा रिलाइंस वाले मन अपन जियो सिम म देवत हावय। आगू 31 दिसंबर के बंद ले होवइया रिहिसे फेर अब मार्च तक बाढ़गे। ठट्ठा करे के बेरा नइये नइते आरबीआई अउ आयकर देवता मन सो बिनती करत पहिली इही मांगतेन के अब 4 जी मोबाइल अउ जियो सिम कार्ड दे देवा...।




नोटबंदी विशेष लेख का अन्य लिंक- 

5 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (07-12-2016) को "दुनियादारी जाम हो गई" (चर्चा अंक-2549) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. चर्चामंच-"दुनियादारी जाम हो गई" (चर्चा अंक-2549)में शामिल करने के लिए आपका शु​क्रिया.

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (24-12-2016) को गांवों की बात कौन करेगा" (चर्चा अंक-2566) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. चारीचुगली के चारी— "चर्चामंच"- गांवों की बात कौन करेगा (चर्चा अंक-2566) म बड़ सुघर होइसे—
    .ब्लॉग म आप सबके सुवागत हवय...जय जोहार।

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  5. अच्छा लेख
    नव वर्ष की मंगलकामनाएं
    http://savanxxx.blogspot.in

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