17 Jun 2017

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: 'योग ले निरोग बनाही' के सिरिफ रिकार्ड बनाही

आज सरी दुनिया म योग ह तन, मन ल फरिहर करे के बने साधन बनगे हावय। आगू के समें म अइसन कारज सिरिफ बड़े-बड़े रिसी मुनी मन भर करय। अपन जप अउ तप ले सिद्धी पावय अउ लोगन ल भव ले उबारे के नेक काम करय। फेर अब समे के संग योग के रूप म तको बदलाव देखब म अइस। योग अउ साधना ले लोगन ल निरोग बनाये के उदीम चलत हाबे। योग गुरू मन बताथे के कोन से योगासन करे म कति-​कति रोग भागथे येकर जानकारी देवत उन मन परमान तको देखाथे। आज के समे ल देखत योग अउ साधना लोगन मन बर घातेच जरूरी होगे हावय। ऐती-ओती चारो मुड़ा के हाय-हपट ले जीव तालाबेली हो जथे। मुड़ पीरा ले कंझाय मन ल सुकून दे खातिर योग ल बुढ़वा, जवान के संग नोनी मन तको अपनावत हाबे। समे के संग हमर खान-पान अउ कामधंधा तको बदलगे हावय अइसन का लोगन कुछू अइसे उदीम खोजथे जेन तनाव ले मुक्ति देवय। भारत के संगे संग अब सरी दुनिया योग ल ही सब रोग खातिर उपयोगी मानत हाबे। मन चंगा तव कठउती म गंगा काहत योगासन म दुनिया रमत हाबे। हिमालय के पहाड़ी म जाये जरूरत नइये जेन जिहा ठउर मिलत हाबे उहें धियान योग म बइठे घंटा-पाहर।

कोनो भी धरम के संत होवय सबोच सिद्धी साधना के बल म पाये हाबे अउ साधना ध्यान ले आथे तव योग ल हम सरी रोग के रामबाण उपचार के रूप म तको अपना सकत हन। योग ह रोग ल तो दूरिहाथे ये उपचार होगे, फेर योग करे ले कोनो प्रकार के रोग नइ होवय ये लोगन बर संजीवनी के काम करत हाबे। तनाव अउ से मुक्ति पाये खातिर घर-परिवार के सबो माई​ पिला जुर मिलके घरे म योग ल अपन दैनिक जीवन म उतारके घंटा पाहर योगासन करथे। संझा-बिहनियां धियान म बइठे बर कोनो खास नेंग-जोग के घलोक जरूरत नइये, आज योग एकदम आसान होगे हावय। अउ योग ल सीखे के तमाम साधान तको आसानी ले मिलत हाबे। रोज के टीवी चैनल म लाइव योग गुरू मन सीखावत हे कतकोन पुस्तक के प्रकाशन होय हाबे। जेन ल कोनो रोग नइये तेन ल कोनो विशेष योगगुरू के जरूरत नइये फेर रोगी मनला योग गुरू के अनुसार योग ल करना चाही ताकि कोनो अलहन झिन होवय। आसानी से घर म करे लायक गजब अकन योग हाबे जइसे के-
  • सुखासन
  • अर्धपद्मासन
  • वज्रासन
  • शशक आसन
  • मार्जारि आसन
  • ताड़ासन
  • समपाद आसन
  • शवासन
  • सिंहासन
  • वृक्षासन
  • पद्मासन
  • तिर्यकताड़ासन
  • कटिचक्रासन
  • पादहस्तासन
  • उष्ट्रासन
  • ​पश्चिमोत्तानासन
  • नौकासंचालन
  • चक्कीचालान

ये योग मन ल करे खातिर लोगन ल योग-शिक्षा के सामान्य जानकारी होना चाही।
  • योग खाली पेट करना चाही, जने मन भात खा डरे हाबे तेन मन तीन-चार घंटा के बाद योगासन करय। आहार म तको सात्विक भोजन लेवय।
  • योग करे के पहिली शौच, स्नान जइसे नित्यकर्म ले मुक्त होके करय।
  • कठिन आसन ल बरपेली झिन करय।
  • योग ल बरोबर भुइया म बइठ के करय, बोरा जठाके पेड़ तरी करे ले अउ बने धियान म मन लगही। जादा रोठ रजई म झिन बइठय।
  • योग ल बिहनियां करना बने होथे अउ योग करे के बाद थोकिन रूकय तेकर पाछू कुछ अल्का खावय। योग करे के बाद हबरस ले कुछू भी नइ खाना चाही। फल, दूध या अंकुरति अनाज योगासन के आधा घंटा बाद खाना चाही।

प्राणायाम-: वर्तमान समें म प्राणायाम ल सबो उमर के लोगन मन करत हाबे, आसान अउ असरकारक होय के सेती। जेन म प्राणायाम माने "प्राण" अउ "आयाम" अर्थात  प्राण के उलट गमन। 
  • भस्त्रिका प्राणायाम
  • कपालभाति प्राणायाम
  • बाह्य प्राणायाम
  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम
  • भ्रामरी प्राणायाम
  • उद्गीथ प्राणायाम
  • प्रणव प्राणायाम
  • उज्जायी प्राणायाम
  • सीत्कारी प्राणायाम
  • शीतली प्राणायम
  • चंदभेदी प्राणायाम
जइसन अउ प्राणायाम के केउ प्रकार बताये गे हावय जेन ल योगगुरू के बताये अनुसार करे ले उचित लाभ होही।

ये पइत योग दिवस ल बिकराल रूप मनाये खातिर भारत सरकार बनेच जोर-शोर ले ​भीड़े हावय। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस दिवस 21 जून के भारत म योग ह नवा किर्तिमान बनाही। लाखों आदमी एके संघरे योग करे के गिनीज बूक म वर्ल्ड रिकार्ड म भारत के नाम दर्ज होही। केंद्र ले लेके राज्य मन तको योग के तियारी म लगे हाबे। इहां तक गांव गली मो​हल्ला म तको योग के प्रचार-प्रसार दिखत हाबे। खास करके भाजपा शासित राज्य मन तो अउ ज्यादा योग-योग रटत हाबे। योग के सरकारी रटन ह तभे सफल होही जब लोगन खुद ले योग साधना ल अपनाही। योग के सबले पहिली पाठ ह इही किथे के योग करत बखत मन म कोनो प्रकार के तनाव नइ होना चाही, काकरो केहे म नहीं बल्कि स्वयं होके मन से योग म मन लगावय। सरकार के ये कारज म सबो जुरमिलके योग दिवस म रिकार्ड बनाये खातिर नहीं बल्कि अपन तन-मन ल फरिहाय खातिर जुरियावन।

6 comments:

  1. behtareen site...kathin chhattisgarhi shabdo ka meaning bhi bata dein to aur bhi achha lagega padhne me

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद माननीय इस सलाह के लिये। अब से अपने प्रत्येक लेख पर आपके सुझाव पर अमल करते हुये कठिन शब्दों का अर्थ भी लिखूंगा।

      Delete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (20-06-2017) को
    "पिता जैसा कोई नहीं" (चर्चा अंक-2647)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी शु​क्रिया। चर्चा मंच अंक—2647 में मेरे लेख को स्थान देन के लिये।
      चर्चा में — चारीचुगली, searchoftruth सत्यकीखोज, उड़न तश्तरी ...., Ocean of Bliss, मुसाफ़िर हूँ यारों .., साझा आसमान, उम्मीद तो हरी है, BHARTI DAS, उलूक टाइम्स,! कौशल !, अर्पित ‘सुमन’, नीरज, स्वप्न मेरे ..., ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र आदि सभी अंतरजाल के लेखों को पढ़कर अभिभूत हूं।

      Delete
  3. सार्थक और बढ़िया आलेख
    बधाई

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय...

      Delete