सुरता हीरालाल काव्योपाध्याय 2012

छत्तीसगढ़ी व्याकरण के सर्जक हीरालाल काव्योपाध्याय
               नव उजियारा सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था डहर ले आयोजित सुरता हीरालाल काव्योपाध्याय 2012 म छत्तीसगढ़ी भाखा खातिर जबर बुता करइया जुन्नटहा साहित्यकार मन के सम्मान करे गिस। 23 सितंबर के वृंदावन हॉल रायपुर म माई पहुना माननीय चंद्रशेखर साहू मंत्री छत्तीसगढ़ शासन अऊ माननीय विजय बघेल के पगरईती म साहित्यकार डॉ. बलदेव साव (रायगढ़), डॉ. दशरथलाल निषाद 'विद्रोही (धमतरी), श्री रघुबीर अग्रवाल 'पथिक (धमतरी), डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र जी मन सम्मानित होइन। इही संघाती हीरालाल काव्योपाध्याय के रेखाचित्र ल साकार रूप देवइया चित्रकार भोजराज धनगर के घलो शॉल, श्रीफल अउ स्मृति चिन्ह ले सम्मानित करे गिस।
          संस्था के अध्यक्ष सुशील भोले अउ सचिव जयंत साहू ह संघरे विज्ञप्ति जारी करत बताइन कि कार्यक्रम म आमंत्रित वक्ता डॉ. प्रभुलाल मित्र जी ह हीरालाल से हीरालाल काव्योपाध्याय तक के जीवन के बारे म संक्षित जानकारी देवत उनकर व्यक्तित्व, शिक्षा अउ व्यवसाय के बारे म अवगत करावत किहिन कि ये हमर बर गरब के बात आए की हमन बहुमुखी प्रतिभा के धनी के धरती म जनम लिये हन। तव हमरो फरज बनथे कि हमू मन हीरालाल काव्योपाध्याय के करे कारज ल सुरता करन अउ ओकरे देखाय रद्दा म रेंगन। संस्था के अध्यक्ष सुशील भोले ह अपन स्वगत भासन म पहुना मन ले निवेदन करिन कि शासन ह हरेक साल राज्योत्सव म गजब अकन सम्मान बांटथे, ओमा हीरालाल काव्योपाध्याय के नाव से सम्मान के अभी तक नइ सुरू करे गे हवय। अभी तक जतेक भी सम्मान के दे जावथे उंकर कारज के गुनान करे जाए तो हीरालाल काव्योपाध्याय के बुता ह सबले जबर हे। शासन हा हीरालाल काव्योपाध्याय सम्मान अउ पं. रविशंकर शुक्ल विश्व विद्यालय म हीरालाल काव्योपाध्याय शोध पीठ बनय। संस्था के ये मांग म पहुना मन के संगे-संग कार्यक्रम म उपस्थित प्रदेश भर के साहित्यकार मन घलो एक सुर येकर समर्थन करिन।
            मुख्य अतिथि चंद्रशेखर साहू जी अपन उद्बोधन म किहिस कि हीरालाल काव्योपाध्याय सचमुच म छत्तीसगढ़ के गौरव आए आउ मैं आज ये जलसा म आके अपन आप ल भागमानी महसुश करत हाबवं। काबर कि मोरे विधान सभा क्षेत्र अभनपुर के कॉलेज के नामकरण हीरालाल काव्योपाध्याय के नाव म करे गे हाबय। अतेक दिन बिते के बाद घलो इहां के साहित्य-कला जगत के गजब झिन मन उनला जानबे नइ करय ये हमर दुर्भाग्य आय। हीरालाल जइसे महापुरूष के कारज न बिरथा नइ जावन देवन, ओकर सहिक काम तो नइ करे सकन फेर ओमन जेन छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़ी बर करिन ओला सुरता तो करेच सकथन। ओमन संस्था के कारज के सराहना करत स्वेच्छा अनुदान दे के घोषण घलो करिन अउ यहू वादा करिस कि शासन ह घलोक अइसने देवें एकर बर ओमन पूरा प्रयास करहीं। कार्यक्रम पगरईती करत माननीय विजय बघेल ह किहिन कि हीरालाल सिरतोन के हीरा रिहन अउ हीरे का परख ल जौहरी जानथे फेर आज काल के जौहरी अपन-अपन स्वार्थ साधे बर विभूतियों की आढ़ लेथे। अइसन स्वार्थी मन ले हट के हमन ला निस्वार्थ काम करना हे अउ हीरालाल जइसे हीरा के चमक ल कमतियावन नइ देना हे। अऊ आगू वोमन किहिन कि छत्तीसगढ़ी भाखा ल संविधान की आठवीं अनुसूची में सामिल करवाय बर हर संभव प्रयास करहीं।





             कार्यक्रम म सम्मान समारोह के बाद दूसरइया पांत म छत्तीसगढ़ी काव्य पाठ के घलो आयोजन करे गे रिहिस। जेमा संस्था के सुशील भोले, चंद्रशेखर चकोर, जंयत साहू, गोविंद धनगर, तुकाराम कंसारी, दिनेश चौहान, भोलाराम सिन्हा के संगे-संग साहित्यकार डॉ. सुखदेव राम साहू, डॉ. निरूपमा शर्मा, डॉ. पंचराम सोनी, श्रीमती सुधा वर्मा, अंजनी कुमार अंकुर, डॉ. दुर्गा मेरसा, जगतारण डहरे, श्यामनारायण साहू, दुर्गा प्रसाद पारकर, नेमीचंद हिरवानी, शरद कुमार शर्मा, दिवाकर मांझी, मकसुदन राम साहू, बन्धु राजेश्वर राव खरे, चोवाराम, विटठलराम साहू, सगार कुमार शर्मा, प्रो. अनिल भतपहरी, पुनूराम साहू, श्रीधर वराडे, कु. रीता विभारे, श्रीमती जयभारती चंद्राकर, परमेश्वर कोसे, जे.आर.सोनी, राम बिशाल सोनकर, हेमंत वैष्णव, उत्तम ठाकुर, श्रीमती शोभा शर्मा, श्रीमती आशा ध्रुव, पं. सुदामा शर्मा अऊ गजब झिन कविता प्रेमी, कवि, साहित्यकार उपस्थित  रिहिन।
                                                            

  जयंत साहू

चुगलाहा

           गांव ल तो सुनता अउ सद्भावना के ठउर केहे जाथे। नित नियाव के आसन म बइठे गांव के सियान ह गांव भर ल सुमता के डोरी म बांधे रिथे। परेम के तुतारी ले गांव भर ल हॉंकथे। कोनो ल दुख पिरा झन होवे किके गांवे म अपन मति अनुसार नियम बनाय रिथे। का अमीर का गरीब छोटे बड़े सबो ल सियान बबा ह एके लउठी म हॉके। अपन बखत म मानपुर गांव घलो सुनता अउ एकजुटता के मिसाल रिहीस फेर का करबे सबे दिन एक बरोबर नइ राहय अब सियान ह सियाने होगे, नित नियाव ह अब थाना कछेरी के होगे हे। गांव तिर म थाना का आगे थानादार बात-बात म गांव आ धमकथे।
          दाउ ह अपन पाहरो मे कभु थाना कछेरी नइ गे रिहीस फेर का करबे जब ले नियतखोर कोतवाल अउ घुसखोर थानादार के जोड़ी भराय हे तब ले दाउ अउ गांव वाला मन ल लिखरी-लिखरी बात बर हवलदार करा खड़ा होय बर परथे।
          ओ दिन एक घर सास बहू के झगरा होइस परोसी ल आरो नइ लगिस। फेर चुगलाहा कोतवाल के कान म खजरी उमडि़स ते पाय के गांव भर के मन गम पागे। कोतवाल के करनी अतकेच भर नोहे। बाप बेटा के झगरा, कोनो के भइसी गवागे, कुकरी चोरी होगे, कोनो ल कुकुर चाब दिस अइसन-अइसन नान-नान बात म कोतवाल ह थाना वाला ल बलाके गांव के लोगन मन ल परसान करय। इही थाना कछेरी के सेती गांव के पंचइत अउ नित नियाव छिदीर-बिदीर होगे। हरेक बात म थाना आगे। 
         मातर के दिन के बात आय मदन अउ दया ह झगरा होइस। नसा के रोस म दोनो झन मारिक-मारा होइस। कोनो नइ छोड़ातिस त तो मुड़ी कान के फुटत ले हो जतिस। सियान मन छोड़ाइस अउ घर म ओइलइस। बिहनीया नसा उतरे के बाद मदन अउ दया दोनो झन अपन-अपन कोती ले पंचइत सकेलीस। दाउ ल फैसला करे बर बलाइस। पंचइत सकलाय देख के कोतवाल के आखी फुटगे। जाके तुरते थाना म गांव के पंचइत के बात ल एक ले दू करके बता दिस।
          थानादार ह गांव अइस अउ खुन के मामला ये किके दूनो ल अंदर कर दिस। सिपाही संग भला कोन लड़तिस दाउ घलो चुप रइगे। मदन अउ दया के थाना म जाय के पाछु दोनो के घर वाला मन मिंझर के दाउ करा अपन-अपन घर वाला ल छोड़ाय के बिनती करिस। दाउ ह थाना म पइसा कउड़ी भर के दोनो झन ल छोड़ा के लानिस। एक घाव जिहां खुसखोरी के आदत परगे ते कहां छुटना हे। कोतवाल ह तो गांव म सिपाही मन के चुगलही करे बर बइठे रिहीस। उही ह खभर करे अउ दोनो कोत के पइसा झोरे। 
          गांव म कोतवाल के जिये खाय के पुरती कोतवाली जमीन हे तभो ले चोट्टही करके खाय बिगर ओकर पेट नइ भरे। थाना के डर म कोनो ओला कांही काहत घलो नइ रिहीस। ओकरो पारी आही त मजा बताबो किके मने मन म सबो बैर धरे राहय। दाउ घला कोतवाल के पारी के अगोरा करत रिहीस।
         एक दिन बिहनिया के बेरा रिहीस गांव भर के मन अपन-अपन काम म जाय के तियारी करत रिहीस। कोनो ल कोनो से गोठियाए के फुरसद नइ रिहीस। सबो झन बुता म मगन रिहीस ओतकेच बेर कोतवाल ह रेरी पारत घर ले निकलीस। चोर... चोर... चोर...। मोर घर म चोर खुसरे हे बचावा दाई ददा हो। मोला बचावा चोर... चोर...। चोरहा मन मुह म साफी बांधे कोतवाल ल मारत पिटत ओकर घर के संदूक पेटी ल खोले लगिस। कोतवाल ह अपन घर के रूपिया पइसा ल चोरी होत देख चोर चोर किके चिल्लावे। गांव वाला मन कोनो ओकर मदद बर आगु नइ अइस। चोरहा मन कोतवाल के घर म दंगा दासी करिस अउ चोरी करके चल दिस। कोतवाल रो-रो के करलई ले बताय लगिस।
           कोतवाल ह सबो किस्सा ल बतावथे अउ गांव वाला मन किस्सा सुने बरोबर हुकारू देवत हव हव किके सुनथे। कोतवाल घर ओतेक अकन के चोरी होय हे तभो ले कोनो ह मया के दू भाखा नइ बोलत हे। बने बेवहार के रितिस त तिर तखार के मन ओधतिस नियतखोर कोतवाल के चरितर के सेती दुख म घलो अपने अकेल्ला हे। उहू ह तो काकरो सुख दुख म साथ नइ दिस त ओकरे दुख म कोन साथ दिही। कोतवाल ह पर के झमेला म जोझा परके धन कमाय रिहीस। उपराहा म चोरी लुका ले अपन कोतवाली जमीन ल घलो बेचे रिहीस। घर म बने रूपिया के सकलाती होइस अउ बिलई कस झपटती होगे। पर के ल झपटे परे तेकर सेती ओकरो झटइस।
         रोवत गावत कोतवाल थाना पहुचिस अउ चोरी के बात ल थानादार ल बतइस। थानादार तमतमावत गांव अइस। गांव म एको मनखे नही। सबो अपन-अपन काम बुता म चल दे रिहीन। गांव म जइसे कुछू होयच नइये तइसे बरोबर रिहीस। देख के थानादार ल अचंभा लागिस। कोतवाल ल किथे- कइसे कोतवाल तोर घर सिरतो म चोरी होय हे। कोतवाल किथे हहो मालिक गांव भर के आगु म चोरी होय हे। गांव भर के आगु म चोरी होय हे फेर गांव म तो एको मनखे नइ दिखे। थानादार गांव के एक झन सियान ल पुछिस कइसे गा कोतवाल घर चोरी होवत रिहीस त रेहेस का। सियान किथे- कतका बेर चोरी हो गे साहेब हम तो जानबे नइ करन, येदे तुहरे मुह अभी सुने हन। लइका मन खेलत रिहीस तेमन ल पुछिस- तुमन देखे हव का। लइका मन किथे- चोरह घर का चोरी होही गा, लबारी मारथे। थानादार गांव वाला मन ल पुछ-पुछ के हलाकन होगे कोतवाल घर के चोरी ल कहू जानबे नइ करे। कोतवाल के समान चोरी होगे उपर ले कोना ह बताय बर तियार नइये।
          थानादार बिगर सबुत के पतियाबे नइ करिस कि ओकर घर चोरी हो हे। थानादार कोतवाल ल किहीस दु चार सौ देबे त तोर केस बनाहू। चोरहा मोर हांथ आ जही त तोर रूपिया मिल जही नही ते उहू ल गवांए जान। आखिर म थानादार ह कोतवाले ल समय खराब करथस किके खिसयइस अउ उही पावं लहुटगे।
          अतका बिते के बाद कोतवाल ल समझ आगे रिहीस की गांव म रइ के गांव वाला संग दोगलई करेवं तेकर फल आय किके। अपन करनी म छिमा मागे बर पंचइत सकेलिस। मानपुर म एक बेर फेर नियाव के आसन म दाउ बइठिस। सरी गांव वाला के आगु कोतवाल किहिस कि मै लालच म पर के नान नान बात के लिगरी लगा के सबला थाना कछेरी म रगेढ़त रेहेव। अब मोला क्षमा करदव। अइसन गलती दुबारा नइ करवं। मोर करनी के सजा तो मोला मिलगे मै कंगाल होगेव। दाउ ह कोतवाल ल अपन करनी म पछतावत देखके किहीस हमर पंचइत म काकरो संग अनियाय नइ होय। दाउ ह मदन ल आरो करिस। मदन अउ दया ह एक ठन मोटरी लान के मढ़इस। दाउ किथे कोतवाल ले धर तोर रूपिया पइसा ल, तै सरी गांव ले बैर करेस अपन लालच बर फेर गांव के मन तोर ले नही तोर लालच ले बैर राखे रिहीस। गांव के सुनता टोरे बर तै का-का नइ करे होबे। अब देखे डरेस न गांव के नियाव अउ गांव के सुनता।