6 Nov 2011

नरई के नसबंदी

गांव म धान लुवर्इ के काम सुरू होगे हे,खेती खार कमतियागे हाबे ते पाय के बनिहार भुतिहार के संसो नइये। एक झन खोजे बर जाबे तव चार झन मिल जथे। एसोच भर आय ताहन पउर बर बनिहार भुतिहार के जरूरते नइ परे। खेते नइ रही तव कहां के बनी अउ कहां के भुतिहार। फेर बनिहार मन ल घलो काम के संसो नइये काबर कि जेन जगा खेत हे ओ जगा बड़े बड़े माहल बनही अउ बाहिर ले बड़का-बड़का सेठ मन आही। सेठइन मन घर के काम बुता ल तो करे नही तव इही गांव के खेत कमइया मन उकर घर जाके झाड़ू पोछा करही। बर्तन मांजही ओकर कपड़ा ओनहा धोही। खेत रहीस त ठसन रिहीस किसान कहावे,धरती के असल बेटा कहावे अब तो कोनो गत नइ रइगे। साहर वाला मन वोमन ल नवा नाम देहे ''लेबर''।

 देस परदेस सबो कोती इहीच हाल हे, विकास के नाम अब खेती खार के दोहन होवथे सड़क बनाय बर बनगे हाबे तव चौडीकरण, आफिस बनाय बर नही तव नेता अउ अफसर के बसुंदरा बनाय बर धनहा डोली संग कुकृत्य करे जावथे। कृषि भुमि ल आवासी म परिवर्तित करके उपजाउ माटी उपर अत्याचार करके महल खड़े करत हाबे। ये सब काम खुले आम होवथे तभो ले पंच परमेश्वर टोपा बांधे बइठे हे। का खेती खार के बंदरबाट करे म परमेश्वर(शासन) के घलो हाथ हे ? यदि नही तो खेती खार ल बचाय बर कोनो सार्थक पहल काबर नइ होवथे ? 

जेन चक (खार) के लुवत ले पंदराही अठोरिया हो जाए वो हा दुये दिन म लुवागे। येहा कृषि विभाग के उन्नत तकनीक के कमाल नोहय बल्की जमीन दलाल मन के कमाल आय। चरिहा-चरिहा पइसा कुड़हो के किसान मन ल हिरो डरे हे। किसान मन अब अपने खेत के नरर्इ के नसबंदी कराय बर दलाल मन के दुवारी जावथे। नरर्इ के नसबंदी सुन के अचरज होवथे होही लेकिन ये बात सत्य हे। बनिहारिन मन खेत लुवत लुवत काहथे कि एसोच भर अउ ताहन पउर बर इहां काही नइ उपजय काबर कि दुलसिया भउजी ह नसबंदी करइस तइसने बरोबर एकरो हो जही। नरर्इ के नसबंदी होय ले खेत परिया पर जही अउ ताहन दलाल मन कृषि ल आवासी म परिवर्तित करके नक्सा पास कराही अउ मकान बना लिही। जब ये बात बनिहारिन के समझ आगे तव परमेश्वर के समझ काबर नइ आवथे या समझ के भी बेसमझी हे तेन ल उही जाने। लोग लइका के बड़वार ल रोके बर नसबंदी कराय जाथे वोइसने बरोबर पैदावार के रोके खातिर नरर्इ के नसबंदी होवथे। कृषि वैज्ञानिक मन तो सपना म घलो नइ सोचे रिहीस होही की नरर्इ के नसबंदी हो सकत हे। खैर ये तो उंकर विषय नोहय काबर कि ओमन अउ वोकर विभाग तो दूसर काम म व्यस्त हे।
कृषि मंत्रालय तो उन्नत बीज,उन्नत तकनीक अउ रोग रार्इ के उपचार अउ वोकर नियंत्रण के राग अलापत हे। जब खेते नइ रही तव ये सब कोन काम के। फसल अउ पैदावार के ल छोड़ के पहिली खेत के संरक्षण कर कुछ काम करव। कृषि मंत्रालय का सिरिफ काठा धरे धान नापे बर बइठे हे। बेरा के राहत खेत ल राष्टीय धरोहर के रूप म संरक्षित कर लेना चाही नही त एक दिन कृषि वैज्ञानिक मन के प्रयोग करे के पुर्ती घलो खेत नइ बाचही। खेत के बंदरबाट करइया मन उपर तो कोनो विभाग के लगाम नइये अब आखरी म कृषि मंत्रालय भर दिखत हे हो सकथे उही ह संज्ञान म लेके खेती ल बचाय के कुछु उदीम करही।

2 comments:

  1. खेत खार ला बचाना जरूरी हे.ऐखर बर हम सबला मिलजूल के ठोस कदम उठाय ल परही.

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  2. सिरतोन कहेस जयंत भाई.

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