नरई के नसबंदी

गांव म धान लुवर्इ के काम सुरू होगे हे,खेती खार कमतियागे हाबे ते पाय के बनिहार भुतिहार के संसो नइये। एक झन खोजे बर जाबे तव चार झन मिल जथे। एसोच भर आय ताहन पउर बर बनिहार भुतिहार के जरूरते नइ परे। खेते नइ रही तव कहां के बनी अउ कहां के भुतिहार। फेर बनिहार मन ल घलो काम के संसो नइये काबर कि जेन जगा खेत हे ओ जगा बड़े बड़े माहल बनही अउ बाहिर ले बड़का-बड़का सेठ मन आही। सेठइन मन घर के काम बुता ल तो करे नही तव इही गांव के खेत कमइया मन उकर घर जाके झाड़ू पोछा करही। बर्तन मांजही ओकर कपड़ा ओनहा धोही। खेत रहीस त ठसन रिहीस किसान कहावे,धरती के असल बेटा कहावे अब तो कोनो गत नइ रइगे। साहर वाला मन वोमन ल नवा नाम देहे ''लेबर''।

 देस परदेस सबो कोती इहीच हाल हे, विकास के नाम अब खेती खार के दोहन होवथे सड़क बनाय बर बनगे हाबे तव चौडीकरण, आफिस बनाय बर नही तव नेता अउ अफसर के बसुंदरा बनाय बर धनहा डोली संग कुकृत्य करे जावथे। कृषि भुमि ल आवासी म परिवर्तित करके उपजाउ माटी उपर अत्याचार करके महल खड़े करत हाबे। ये सब काम खुले आम होवथे तभो ले पंच परमेश्वर टोपा बांधे बइठे हे। का खेती खार के बंदरबाट करे म परमेश्वर(शासन) के घलो हाथ हे ? यदि नही तो खेती खार ल बचाय बर कोनो सार्थक पहल काबर नइ होवथे ? 

जेन चक (खार) के लुवत ले पंदराही अठोरिया हो जाए वो हा दुये दिन म लुवागे। येहा कृषि विभाग के उन्नत तकनीक के कमाल नोहय बल्की जमीन दलाल मन के कमाल आय। चरिहा-चरिहा पइसा कुड़हो के किसान मन ल हिरो डरे हे। किसान मन अब अपने खेत के नरर्इ के नसबंदी कराय बर दलाल मन के दुवारी जावथे। नरर्इ के नसबंदी सुन के अचरज होवथे होही लेकिन ये बात सत्य हे। बनिहारिन मन खेत लुवत लुवत काहथे कि एसोच भर अउ ताहन पउर बर इहां काही नइ उपजय काबर कि दुलसिया भउजी ह नसबंदी करइस तइसने बरोबर एकरो हो जही। नरर्इ के नसबंदी होय ले खेत परिया पर जही अउ ताहन दलाल मन कृषि ल आवासी म परिवर्तित करके नक्सा पास कराही अउ मकान बना लिही। जब ये बात बनिहारिन के समझ आगे तव परमेश्वर के समझ काबर नइ आवथे या समझ के भी बेसमझी हे तेन ल उही जाने। लोग लइका के बड़वार ल रोके बर नसबंदी कराय जाथे वोइसने बरोबर पैदावार के रोके खातिर नरर्इ के नसबंदी होवथे। कृषि वैज्ञानिक मन तो सपना म घलो नइ सोचे रिहीस होही की नरर्इ के नसबंदी हो सकत हे। खैर ये तो उंकर विषय नोहय काबर कि ओमन अउ वोकर विभाग तो दूसर काम म व्यस्त हे।
कृषि मंत्रालय तो उन्नत बीज,उन्नत तकनीक अउ रोग रार्इ के उपचार अउ वोकर नियंत्रण के राग अलापत हे। जब खेते नइ रही तव ये सब कोन काम के। फसल अउ पैदावार के ल छोड़ के पहिली खेत के संरक्षण कर कुछ काम करव। कृषि मंत्रालय का सिरिफ काठा धरे धान नापे बर बइठे हे। बेरा के राहत खेत ल राष्टीय धरोहर के रूप म संरक्षित कर लेना चाही नही त एक दिन कृषि वैज्ञानिक मन के प्रयोग करे के पुर्ती घलो खेत नइ बाचही। खेत के बंदरबाट करइया मन उपर तो कोनो विभाग के लगाम नइये अब आखरी म कृषि मंत्रालय भर दिखत हे हो सकथे उही ह संज्ञान म लेके खेती ल बचाय के कुछु उदीम करही।

भाग लछमी

एक गांव म धनीराम नाम के एक झन मुरहा पोट्रटा मनखे रिहीस। वोकर कर गावं म घर न खार म खेत, जिंहे मिलय दाना पानी तिंहे करे बसेरा। धनीराम के गरीबी ह अतेक दुबर होगे रिहीस कि वोहा भिख मांगे के सुरु कर दिस। कोनो दिन मिल जए त खा लय नइ मिले त लांघन रइ जए। कोनो कोनो दिन जादा मिल जए त चार झन बाट के खाय। झुठ लबारी अउ चोरी चमारी ले धनीराम दस हांथ दुरिहा राहय।

एक दिन भगवान बिसनू अउ लछमी दार्इ ह धरती तनि किंजरे बर आय रिहीस। धरती के नजारा देखत देखत लछमी दार्इ ह बिखमंगा धनीराम ल देख डरिस। भगवान बिसनू ल पुछथे ये कोने स्वामी। भगवान किथे ये धनीराम आय। तव माता किथे धनीराम के अइसन गत काबर कर देहव भगवान, बिचारा गरीब पेट भरे बर गली गली किंजरथे।

भगवान बिसनु किथे देवी वो बिचारा नोहय वो तो पुराना पापी ये। धनीराम ह अपन पाछु जनम म जइसन करम करे रिहीस तइसन फल पावथे।

किथे न '' करम प्रधान विश्व कही राखा अउ जो जस करम करही जस फल चाखा ''।

जतके कन येकर पुन रिहीस ततके कन येला सुख मिलीस अब आगु ये अपन भाग के ल खाही।

धनीराम के हालत देखके लछमी दार्इ ह करलइ मरथे। वोहा भगवान ल किथे स्वामी चलव न येकर मदद करथन। तब भगवान ह लछमी दाइ ल समझावत किथे तै ओकर उपर दया झन लछमी, तकदीर ले जादा अउ मेहनत ले कम कोनो ल नइ मिले।

ये दुनिया ह जब ले बने हे तब ले अंजोरी अंधियारी ह बरोबर चलत आवथे। धरम अउ आस्था के ये धरती म करम के बड़ महत्ता हे। भाग्य ल मानुस अपन पुर्व जनम ले लिखा के आय रिथे। अमीर गरीब, सुखी दुखी, जोगी भोगी सबो रकम के मनखे होथे।

लछमी दार्इ किथे पुर्व जनम ल छोड़ भगवान ए जनम के येकर दुख ल टार दे। ये का दुनिया ये स्वामी एकझन हर छकत ले खावथे, छलकत ले लुटावथे अउ दूसर ह पसिया पेज बर लुलवाथे। सबला बरोबर देतेव भगवान। तब भगवान बिसनू किथे मै तो सबला बरोबर दे रेहेव कोन ह कातका का पइस ये ओकर मेहनत अउ करम के बात हे येमा मे का कर सकथवं।

     भगवान बिसनू कतको समझा डरिस फेर माता ह मानबे नइ करिस। आखिर म भगवान ह धनीराम के मदद करे बर राजी होके धरती म आइस। धनीराम ल धनवान बनाय बर माता ह अपन गहना गुठा ल हेर के एक ठन मोटरी म बांधिस।

     सोना चांदि हिरा मोती ले भरे मोटरी ल धनीराम आवत रिहीस तिही रददा म मड़ा दिस। येती बर धनीराम ह भिख मांगे के नवा नवा उपाय सोचत रिहीस।

     वो सोचथे हाथ गोड़ वाला साबुत आदमी ल आज काल कम भिख देथे अउ खोरवा लुलवा मन ल जादा देथे। मोला भगवान खोरवा काबर नइ बनइस। भिख मांगे बर खोरवा के नाटक तो नइ करे ल परतीस। फेर सोचथे रोजे रोज खोरवा बनना ठीक नइहे एका दिन अंधवा कनवा घलो बनना चही। भगवान बिसनू अउ लछमी दाइ ह सबला लूका के देखत रिहीस। थोरकेच म धनीराम ह आखरी मुंद के अंधवा बनगे। अब लउठी के सहारा म टेकत टेकत रद्दा म रेंगथे।

     रेंगत रेंगत वो ह रद्दा परे गठरी म हपट के गिरगे। धनीराम खिसीया के उठीस अउ आखी मुंदेच मुंदे गहना के गठरी ल कोन आगु आगु म पथरा ढेला बांध के मड़ा देहे किके कस के एक लात मार देथे।

     गहना के गठरी ह डुलत डुलत भगवान मन करा जा के रुकथे। येला देख के भगवान बिसनू ह लछमी दाइ डइर ल देखके किथे देखे देवी वोकर भाग ल तोर गहना ल लात मार के तोरे करा फेक दिस।

     लछमी दार्इ भगवान ले किथे एक मउका अउ देबो स्वामी अब वोकर आगु म जाके ओकर मदद करबो। भगवान किथे ठीक हे चलव भेस बदल के ओकर आगु म।

     येती बर धनीराम घला भेस बदल डरे रिहीस। बइहा पगला ल जेने मेर पाथे तेने मेर सुते बइठे के जगा मिलथे। इही पाय के धनीराम ह बइहा पगला के भेस धरे रिहीस। पगला मन बरोबर रुख राइ झाड़ झरोखा जिही ल पावे तिही त लउठी म मारत पिटत रांय रांय रेगत राहय।

     वोतके बेरा भगवान बिसनु लछमी दाइ धनीराम के आगु म आके किथे धनीराम हमन तोर सहायता करे बर आय हन बेटा। धनीराम सोचिस फेर कोनो वोकर काम बाधा बिघन करे बर आय हे। मेहा भिख मांगे के जिही तरीका अपनाथवं तिही म कोनो ना कोना बाधा परिच जथे।

     वोतका बेरा पथरा म अरहज के गिरेवं अब तूमन आगेव बेटा। राहले तुहर मंजा बतावथवं। धनीराम के एड़ी के रिस तरवा म चड़गे। धर तो एमन ल रे किके लउठी ल उबाके किटकिट किटकिट दड़थे। वो का जाने एमन सउहत भगवान बिसनू अउ माता लछमी हरे किके। बिसनू भगवान ह धरा पछरा भाग के किथे ये भाग्य लछमी तहू भाग नही ते धनीराम ह लउठी म बजेड़ डरही।

     धनीराम घला पाछू पाछू दउड़त किथे भाग लछमी ... भाग लछमी ..... भाग लछमी...।

     अब तक तो लछमी दार्इ ल समझ म आगे रिहीस भाग के खेल ह। धनीराम ल अपन हाल म छोड़ के भगवान बिसनू अउ माता लछमी दूनो झन चल दिस अपन लोक म।