15 May 2012

बजगरी

छायाचित्र- लोक वाद्य संग्रहकर्ता/रंगकर्मी अउ बस्तर बैंड के संयोजक/निर्देशक श्री अनूप रंजन पांडेय जी के संग्रह ले साभार।
                   गांव-गांव के गाड़ा बाजा के बजइया म आधा ह अधमरा होगे हे आधा मन तो सिरागे हे, नवा पीढ़ी के बजगरी आही के नहीं ओकरो ठिकाना नइये। काबर कि जुन्ना गाड़ा बाजा के बजगरी मन ल कोनो संस्था, समिति अउ न तो शासन ह अन्ते कलाकार सहिक आदर अउ मान सम्मान देवथे। अऊ न तो जेकर घर बाजा बजाए बर जाथे ते घरवाले ह वो मन ला एक कलाकार के मान देवय। बजाय के बनि लेथे त बजगरी मन ल एक बनिहारे जानबो का ? अइसन काम करत देख के मन म ये बिचार आथे कि जब आने विधा के बजईया ल वादक-वादक कहिके मान सम्मान देथन तव का ये बजगरी मन अतको के लइक नइये। पाटन तिर के सोनडोंगर गांव के समाजी बाजा पार्टी वाले मन के गजब नाम हे। बर-बिहाव अउ मंगल उच्छाह म बाजा लगाय बर लोगन मन बिगर तोल-मोल के एक जुबान म सोनडोंगर के बाजा ल लगा लेवे। बजगरी मन घलो घर वाला मन ल निराश नइ करत रिहिस। अतेक मन लगा के गाना बजाना करे कि मन खुश कर देवय इही पाये लोगन मन बिदा करे के बेरा उपराहा दू चार आना आगर देवय। अब जोन किसम के बाजा बर-बिहाव म बाजथे तेमन तो कानफोड़ू बाजा आय। तब के अउ अब के दिन ल देखत झुमकाहा ह अपन बाजा मन ल बढ़ जतन के राखे हावय। झुमकाहा के छोड़ उंकर बाजा पार्टी के सबो बजगरी मन देवधाम चल दे हावय। जब ले झुमकाहा के संगत टूटे हे तब ले दफड़ा, दमउ, मोहरी, टिमकी मन ल चुमड़ी म भर के पटऊहा मे टांग दे हावय।
               झुमकाहा ल एक दिन ओकर टूरा ह किथे बाजा मन ल काबर नइ निकालत हाबस। निकालतेस नवा-नवा लइका मन ल सिखातेस। तूमन अपन समय के गजब नामी बजनिया रेहेव अभी तक लोगन मन बाजा लगाय बर तूहर नाव लेके पूछत गांव म आथे। लइका मन ल सिखोतेव तव तूहर नाव ल आगू बढ़ातिस। झुमकाहा किथे इही तो मै नइ चाहवं। हमन ह भले उमर भर बजगरी रेहेन ते रेहेन फेर अब कोनो लइका ल बजगरी होन नइ दवं। कलाकारी के सउख हे त जाव कोनो दूसर कलाकारी करव। लइका मन ल झुमकाहा ह समाजी बाजा बजाय बर मना करय, वो काहय कलाकारिच करे बर हे तव अऊ गजब विधा हे कोनो म जाव फेर गाड़ा बाजा झन बजाव।
                  काबर झुमकाहा ह समाजी बाजा बजाय के नाम से गुसियाथे ये बात ल गांव के सबो कोनो ह जानथे। गांव म एक पइत बड़ेक जान जलसा होत रिहिस। वो जलसा म राज के सबो नेता मन आए रिहिस। हमर राज भर के लोककला दल मन ल नेवता दे के बलाय रिहिन। झुमकाहा मन ल घलो बलाय रिहिन। नेता अइस तव समाजी बाजा वाला मन आगू-आगू जोहारत ठउर तक लेगिन। नेता मन ठउर म जाके भाषण दिन, ताहन फेर बाहिर ले आय कलाकार मन ल पारी-पारी मंच म बला के सम्मान करत गीस। सरी कार्यक्रम ह सीरागे फेर समाजी बाजा वाला मन के पारी आबे नइ करिस। सबो नेता मन अब मंच ले उतर के आर्केस्टा देखे बर नीचे म आगे। रात के दस बजती रिहिस। निसनहा के छाती पिरा उठगे। सबो बजगरी मन सकपका गे। संतरी-कंतरी सबो रिहिन फेर कोनो ह निसनहा ल इलाज पानी कराय के जिकर नइ करिस। मनोरंजन करत हाहा हीही म रमे रिगे। थोरकेच अलथी-कलथी लिस ताहन नारी जुड़ागे। अइसने-अइसने घटना मन म ओकर पार्टी के बजगरी संगी मन सिरागे। संगी मन के सिराय के बाद झुमकाहा ह बाजा ल छुबे नइ करिस। झुमकाहा के मन म इही बात के रिस हमागे हाबे कि सबो गाजा-बाजा अउ नचइया-गवइया वाला मन रूपिया पइसा लेथे। कला के परसादे अपन घर चलाथे। फेर काबर हमन बजगरी अउ वो मन वादक कलाकार होथे। हमर बर एनसन-पेंसन मान-सम्मान काही नइ।
                ये बात के जानबा झुमकाहा के लइका के होइस तव ओहा ये बिसय म गजब गुनान करिस। अउ अपन गांव के संगी साथी मन ल सकेल के एक ठीन संस्था बनइस। संस्था के एके ठीन उद्देश्य रखिस गांव-गांव के पारंपरिक कला ल संजो के रखना हे। गांव के कोनो भी विधा के जानकार होय ओकर मान बढ़ाना हे काबर की वोमन हमर प्रदेश के लोक संस्कृति ल जीवित राखे के बुता करत हे। लइका मन परन करके निसुवारथ काम म लगगे। वोमन गांव-गांव जाके पारंपरिक लोक वाद्य के संग समाजी बाजा दल,गोदना वाली,चिकारा नाच वाला,अखाड़ा वाला, भजनाहा, नाचा पार्टी, सुवा दल, पंथी, बांस गीत गवईया, आल्हा गवईया माता सेवा जइसन लोक संस्कृति के जानकार मन ल एके ठउर म समोख के उंकरे मन के मान बढ़ाय के उदिम म रमगे।
                   झुमकाहा के लइका ह गांव-गांव म अपने सहिक जवान मन ल संगी बना के अपन संस्था ल राज भर म फैला डरिस। अब तो राज म कोना कलाकार ल काहीं के तकलीफ होथे त उंकर संस्था ह भरपूर मदद करथे। कोनो ल आर्थिक तंगई छाथे तिकरों बर वो मन चंदा सकेल-सकेल के मदद करथे। लइका मन ल अइसन काम करत देख के झुमकाहा के मन के पिरा ह थिरइस। एक दिन खुदे अपन लइका ल बला के किथे जा तो रे सीड़ीया लान अउ वो पटउहा के बाजा मन ल हेर। लइका ह खुशी-खुशी गीस अउ बाजा ल हेरिस। सोनडोंगर के समाजी बाजा काहत लागे। नाननान लइका मन के कनिहा म साज बांध के झुमकाहा ह अपन झुमका झनकारिस। देवधाम के रहईया अपन बजगरी संगी मन के नाव सुमर के सोनडोंगर समाजी बाजा पार्टी ल फेर नवा बजगरी मन संग तियार करिस, दफड़ा, दमऊ, मोहरी, टिमकी ह फेर गदके लगगे।

1 May 2012

अपन अउ बिरान

सोनपुर गांव म संभू अउ महादेव नाव के दू भाई रिहीस। दोनो भाई ह गांव के बड़का किसान रिहीस। संभू ह दोनो घर के सियानी करे, ओकर परवार म गोसइन भगवंतिन, ओकर भाई महादेव अउ भाईबहू सांति। संभू के एको झिन औलाद नइ रिहीस। महादेव के दू झन औलाद हे एक गोपाल अउ दूसर बाली। संभू ह अपन भाई ल भाई नही अपन बेटा माने इही बात म संभू के गोसइन भगवंतिन ह जलन मरे।
संभू अउ भगवंतिन के बीच बात-बात म ताना कसी होवत राहय। गोपाल ह गांव रइ के खेती किसानी के काम ल करे अउ बाली ह साहर म पढ़ाई करय।
           उहिच गांव म महादेव के लंगोटिया संगवारी रिहीस। निच्चट गरीब रिहीस ऊपर ले बिमारी घलो घेरे रिहीस। एक दिन अपन जवान छोकरी ल छोड़ के बितगे। संगी के मरे के बाद ओकर बेटी किसना ल अपने घर लान लिस। अब गोपाल अउ किसना ह मिल के घर दुवार के काम ल करे। हांसी खुसी ले दिन कटत रिहीस।
          एक दिन भगवंतिन के भाई के बेटा अउ बेटी ह अपन फुफू घर रेहे बर आथे। भगवंतिन के भतिजा ह गजब अनदेखना रिहीस। संभू ह गोपाल ल बेटा-बेटा काहत रहे ल भगवंतिन के भतिजा मन ल सहे नइ जात रिहीस। ओमन तो इही मंसा लेके आय रिहीस कि अपन फुफू के एको झन औलाद नइ हे सबो चिज बस ल हथिया लेबो। भगवंतिन घलो वोकरे मन के बुध म आगे।
भगवंतिन अउ ओकर भतिजा दोनो झन मिल के घर के बटवारा करा देथे। महादेव के छोटे बेटा बाली घलो सहर ले पढ़ के गांव आगे रिहीस। बाली अउ भगवंतिन के भतिजा दोनो झन साहर म संगे पढ़य ते पाय के दोनो झन के बने जमत रिहीस। बांटा होइस त बाली ह अपन दाई ददा ल छोड़ के वोकरे मन संग होगे। बाली ह वोकरे मन के सिखान म अपन भाई ले बाटा ले डरिस।
           बाप के बाटा के भाड़ी नइ रूंधाय रिहीस ओकरो मन के बाटा होगे। किसमत घलो एकउहा ओकरे उपर रिसागे। दोनो भाई के बाटा के बाद महादेव के तो सुध बुध हरागे। गांव के पंचइत ह ओकर मन के बाटा करइस। बाटा के बाद तुरते बाली के बिहाव होगे। महादेव घर म बीमार परे हे अउ बाली के बिहाव होवथे। महादेव ह बीमारी म मरत हावे अउ बाली के भावंर परत हाबे।
          गोपाल घेरी-बेरी दोनो के नता ल जोरे के उदीम करथे फेर भगवंतिन अउ ओकर भतिजा ह हमेसा नता ल टोरे के काम करय। गोपाल के बिहाव देखे के महादेव ल आखरी इच्छा रिहीस। गोपाल के बिहाव देखे के संभू ल घलो आस रिहीस। गोपाल अउ किसना ह उंकर मन के इच्छा ल पुरा करथे। जब ले बाटा होय हे दोनो के घर म परदा रूंधागे हे। परदा के ए पार संभु अउ वो पार महादेव रो रो के अपन दिन ल कांटे।
बिहाव के बाद बाली ह नौकरी करे बर बाहिर चल देथे। भगवंतिन ह अपन भतिजा के बुध म   रेंगथे। भतिजा ह ओला जोंख असन चुसत हावे। कोरा कागत म दसकत करवा-करवा के ओकर सबो चिस बस ल अपन नाम करा लेथे। संभु बरजथे तभो ले भगवंतिन नइ माने। दसकत वाला कागत ल धरके भतिजा ह सहर भाग जथे।
          अपन तो भागिस संग म घर अउ खेत ल घलो बेच बुचाके संभु अउ भगवंतिन ल कंगला कर दिस। भतिजा अउ भतिजिन दोनो मिल के फुफू के घर दुवार ल बरबाद कर दिस। सबो चिज बस ल लुटाय के बाद भगवंतिन ल चेत अइस कि कोन अपन अउ कोन बिरान। आखिर म गोपाल अउ महादेव ह वोकर घर अउ खेत ल बचा के फेर एक के एक होगे।